बिहार में बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 के विज्ञापन में हो रही लगातार देरी को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। भर्ती परीक्षा की अधिसूचना जारी होने में हो रही देरी के खिलाफ आज राजधानी पटना की सड़कों पर हजारों अभ्यर्थियों का आंदोलन की तैयारी में हैं। इसी कड़ी में बुधवार को पटना में अभ्यर्थियों ने बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। इस बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इस आंदोलन का नेतृत्व करने आ रही प्रमुख छात्र नेत्री खुशबू पाठक को पटना पहुंचने से ठीक पहले ही रास्ते में हिरासत में ले लिया है। बिहटा थाना पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है और वर्तमान में खुशबू पाठक सहित दो से तीन लोगों को थाने में ही हिरासत में रखा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार छात्र नेत्री खुशबू पाठक इस बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए सुबह-सुबह आरा जिले से अपनी गाड़ी से पटना के लिए रवाना हुई थीं। पटना पुलिस को इसकी गुप्त सूचना पहले ही मिल चुकी थी। पुलिस ने खुशबू पाठक के मोबाइल को तकनीकी सर्विलांस पर ले रखा था। मोबाइल लोकेशन और सटीक ट्रैकिंग के आधार पर बिहटा थाना पुलिस की टीम ने जाल बिछाया और रास्ते में ही उनकी गाड़ी को रोक लिया। गाड़ी रुकवाकर पुलिस ने छात्र नेत्री और उनके सहयोगियों को तुरंत अपनी अभिरक्षा में ले लिया।
प्रदर्शन की शुरुआत सुबह 11 बजे पटना कॉलेज से तय की गई है, जहां से हजारों अभ्यर्थी जुलूस की शक्ल में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) कार्यालय की ओर कूच करेंगे। माहौल को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना है और शहर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। इससे पहले ही प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए छात्र नेता खुशबू पाठक को हिरासत में ले लिया, जिससे आंदोलनकारी छात्रों में आक्रोश और बढ़ गया है।
छात्र नेताओं की इस अचानक हुई हिरासत के बाद पटना कॉलेज, कारगिल चौक और गर्दनीबाग धरना स्थल सहित पूरे शहर के प्रमुख चौराहों पर भारी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है। आज के प्रदर्शन को लेकर खुफिया तंत्र भी सक्रिय है और प्रशासन को आशंका है कि आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है। इसी कारण पूरे इलाके को छावनी में तब्दील करने जैसी तैयारी चल रही है।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि पिछले आंदोलनों में उनके साथ जुल्म और ज्यादती की गई। 8 मई को हुए प्रदर्शन में पुलिस लाठीचार्ज के बाद हालात बेकाबू हो गए थे। उस दौरान छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटने, सिर फोड़ने और महिला अभ्यर्थियों के साथ बदसलूकी जैसे गंभीर आरोप लगे थे। TRE-4 अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को पुराने पैटर्न पर जल्द शुरू किया जाए। इसके अलावा पिछले प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों की तत्काल रिहाई और कथित लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की जा रही है।
इससे पहले राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अभ्यर्थियों से प्रदर्शन नहीं करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार अभ्यर्थियों के हित में काम कर रही है और महिला उम्मीदवारों को आंदोलन करने की जरूरत नहीं है। मंत्री ने कहा था कि “हमारी बेटियां राज्य की ताकत हैं और सरकार उनके अधिकारों के समर्थन में मजबूती से खड़ी है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी शक्ति वंदन’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा था कि जब केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं, तब सड़कों पर उतरने की आवश्यकता नहीं है।