कृषि अनुसंधान को खेत तक पहुँचाकर किसानों की आय बढ़ाना हमारी प्राथमिकता: मंत्री

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की 97वीं वार्षिक आम बैठक में मंगलवार को नई दिल्ली में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ सहभागिता की।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की 97वीं वार्षिक आम बैठक में मंगलवार को नई दिल्ली में बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय राज्य मंत्री तथा विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ सहभागिता की। बैठक में कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती, बीज उत्पादन, किसानों की आय में वृद्धि तथा कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी सहित बिहार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।

बैठक में बिहार की कृषि परिस्थितियों और किसानों की आवश्यकताओं को रेखांकित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है। राज्य की समृद्ध कृषि क्षमता को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रसंस्करण एवं कृषि निर्यात से जोड़कर किसानों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। बिहार में कम वर्षा की स्थिति के बावजूद 93 प्रतिशत से अधिक धान रोपणी का कार्य पूरा हो चुका है और निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि मंत्री ने विशेष रूप से मखाना की उन्नत किस्मों के विकास, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, यंत्रीकरण, मूल्य संवर्धन तथा निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए ICAR स्तर पर विशेष अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार के विशिष्ट कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए अनुसंधान संस्थानों, केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

उन्होंने बिहार में बाढ़ एवं सुखाड़ जैसी प्राकृतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जलवायु अनुकूल एवं कम अवधि वाली फसल किस्मों के विकास पर भी विशेष बल दिया। साथ ही डिजिटल कृषि की तकनीकों को छोटे एवं सीमांत किसानों तक पहुँचाने तथा युवाओं और महिला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता बताई। कृषि मंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन एवं प्राकृतिक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान की व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है। रसायन मुक्त फसल, सब्जी, फल, दलहन एवं तिलहन उत्पादन के लिए अनुदान, प्रशिक्षण, बाजार एवं किसानों को उचित मूल्य उपलब्ध कराने की दिशा में भी केंद्र एवं राज्यों के संयुक्त प्रयास जरूरी है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग के बिना राज्यों में तकनीकी विकास का अनुकूल वातावरण तैयार करना कठिन है। कृषि क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त कर चुके युवाओं को कृषि एवं कृषि उद्यमिता से संबंधित योजनाओं में प्राथमिकता देने के लिए केंद्रीय स्तर पर भी आवश्यक पहल की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार द्वारा कृषि शिक्षा प्राप्त युवाओं को कृषि क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जा रहा है।

लघु एवं सीमांत किसानों को संगठित एवं सशक्त बनाने के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी कृषि मंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे छोटे किसानों को सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त करने, सामूहिक रूप से कृषि इनपुट प्राप्त करने, उत्पादन एवं विपणन को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। कृषि मंत्री ने ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का लाभ भी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने की आवश्यकता बताई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका एवं आधारभूत संरचना को और मजबूत किया जा सके।

उन्होंने बताया कि बिहार में ‘किसान कृषि, महिला उद्यम, युवा रोजगार एवं श्रमिक उत्थान सह जनकल्याण संवाद अभियान’ की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान का शुभारंभ 20 अगस्त को बामेती में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया जाएगा। अभियान के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं एवं श्रमिकों के कल्याण तथा कृषि क्षेत्र में रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसरों पर संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश कृषि क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ के संकल्प के साथ कृषि अनुसंधान के परिणामों को खेत तक पहुँचाकर ही किसानों की उत्पादकता, आय एवं जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाया जा सकता है।

मंत्री ने कहा की बिहार सरकार का लक्ष्य है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक का लाभ अंतिम पंक्ति के किसान तक पहुँचे तथा कृषि को उत्पादन से आगे बढ़ाकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, कृषि उद्यमिता एवं निर्यात से जोड़ा जाए। इससे विकसित भारत के साथ विकसित, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बिहार के निर्माण को गति मिलेगी।