पटना में बीपीएससी के जरिए सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर सेटिंग और पैसे के खेल का मामला सामने आया है। महिला दारोगा ने अपने बेटे को बीपीएससी परीक्षा पास कराने के लिए जेडीयू नेता को 40 लाख रुपये का चढ़ावा दिया। जब काम नहीं बना तो मामला पुलिस और अदालत तक पहुंच गया। अब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस मामले में कुम्हरार से पूर्व राजद उम्मीदवार और वर्तमान में जदयू नेता डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
आर्थिक अपराध इकाई की ओर से की जा रही जांच के मुताबिक पटना पुलिस की महिला दारोगा आशा सिंह ने अपने बेटे रितेश को बीपीएससी परीक्षा पास कराने के लिए जेडीयू के प्रदेश महासचिव डॉ. धर्मेंद्र कुमार को 40 लाख रुपये की घूस दी। जब रीतेश बीपीएससी परीक्षा पास नहीं हुआ, तो मामला पुलिस से लेकर कोर्ट तक पहुंच गया।
महिला दारोगा आशा सिंह ने अपने बेटे रितेश कुमार को बीपीएससी परीक्षा में सफल कर सरकारी नौकरी दिलाने के उद्देश्य से विभिन्न स्रोतों से बड़ी रकम जुटाई थी। आरोप है कि यह रकम डॉ. धर्मेंद्र कुमार और अन्य आरोपियों को दी गई थी। बदले में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन जब नौकरी नहीं मिली तो पैसे वापस करने की बात कही गई। ईओयू द्वारा दर्ज एफआईआर में जदयू नेता डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी के अलावा उनके पिता ब्रजकिशोर प्रसाद, पत्नी डॉ. रजनी, महिला दारोगा आशा सिंह और उनके बेटे रितेश कुमार को भी आरोपी बनाया गया है।
जब आरोपियों की ओर से 25 लाख रुपये का चेक लौटाया गया, लेकिन बैंक में लगाने पर वह बाउंस कर गया। इसके बाद विवाद बढ़ा और मामला थाने से होते हुए अब आर्थिक अपराध इकाई तक पहुंच गया। उस समय पुलिस ने मामले की जांच कर जुलाई 2024 में आरोप पत्र दाखिल करते हुए अनुसंधान बंद कर दिया था। हालांकि बाद में इस मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में मामले की गंभीरता को देखते हुए पुनः जांच का निर्देश दिया। इसके बाद पटना सदर के एसडीपीओ (एक) द्वारा दोबारा जांच की गई। जांच रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
रिपोर्ट में कहा गया कि महिला दारोगा आशा सिंह ने पुलिस पदाधिकारी होने के बावजूद अपने बेटे को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए रिश्वत के तौर पर भारी रकम दी थी। पटना पुलिस द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर महिला दारोगा आशा सिंह ने बताया कि उन्होंने एसबीआई की मौर्यालोक शाखा से हाउसिंग लोन, पर्सनल लोन और अपनी बचत मिलाकर 22 लाख रुपये बेटे को दिए थे।
ईओयू की प्राथमिकी के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी जदयू के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में पार्टी के प्रदेश महासचिव हैं। डॉ. धर्मेंद्र चंद्रवंशी का नाम इससे पहले भी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामलों में सामने आ चुका है. पिछले साल जक्कनपुर थाना पुलिस ने उन्हें दरभंगा निवासी नितेश कुमार से करीब 10 लाख रुपये लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।