बिहार की बेटी को 3 करोड़ की लिंकन स्कॉलरशिप, श्रेया बनी इकलौती भारतीय, अब अमेरिका...

बिहार के सिवान की 18 वर्षीय छात्रा श्रेया कौशिक का अमेरिका के प्रतिष्ठित 'लिंकन स्कॉलरशिप' के लिए चयन हुआ है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jul 17, 2026, 4:15:00 PM

बिहार के सिवान की 18 वर्षीय छात्रा श्रेया कौशिक का अमेरिका के प्रतिष्ठित 'लिंकन स्कॉलरशिप' के लिए चयन हुआ है। लगभग ₹3 करोड़ की यह छात्रवृत्ति संयुक्त राज्य अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के सम्मान में दी जाती है। 'लिंकन स्कॉलरशिप' के अंतर्गत प्रतिवर्ष विश्वभर से 10 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। इस वर्ष यह प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाली श्रेया कौशिक एकमात्र भारतीय हैं।

लिंकन स्कॉलर के रूप में चयनित होने के बाद श्रेया अब अमेरिका के प्रतिष्ठित सेंटर कॉलेज से ₹3 करोड़ की पूर्ण छात्रवृत्ति पर स्नातक की पढ़ाई करेंगी। वर्ष 1819 में स्थापित सेंटर कॉलेज अमेरिका के सबसे ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक है। 'लिंकन स्कॉलर्स प्रोग्राम' संयुक्त राज्य अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के केंटकी में साधारण परिवेश से शिखर तक के प्रेरणादायक जीवन तथा सेंटर कॉलेज के 1826 बैच के पूर्व छात्र जॉन टॉड स्टुअर्ट की उस महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करता है, जिन्होंने लिंकन को विधि (कानून) की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और उनके प्रथम विधिक साझेदार (लॉ पार्टनर) बने।

यह छात्रवृत्ति श्रेया की अमेरिका में चार वर्षीय स्नातक शिक्षा का संपूर्ण व्यय वहन करेगी, जिसमें शिक्षण शुल्क, आवास एवं भोजन, पुस्तकें एवं अध्ययन सामग्री, स्वास्थ्य बीमा, यात्रा व्यय तथा अन्य व्यक्तिगत खर्च शामिल हैं। श्रेया के 'लिंकन स्कॉलर' के रूप में चयन की आधिकारिक घोषणा डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री शरद विवेक सागर ने सोशल मीडिया पर की।

बिहार के सिवान में जन्मी तथा बिहार और नई दिल्ली में पली-बढ़ी श्रेया कौशिक ने अपनी स्कूली शिक्षा नई दिल्ली स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय, आया नगर से पूरी की। 13 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल ने उनकी प्रतिभा की पहचान की और उन्हें विश्वस्तरीय शैक्षणिक अवसरों एवं नेतृत्व प्रशिक्षण के माध्यम से व्यवस्थित रूप से तैयार किया। डेक्सटेरिटी ग्लोबल एक राष्ट्रीय संगठन है जो शैक्षणिक अवसरों और प्रशिक्षण के माध्यम से भारत एवं विश्व के लिए नेतृत्व की अगली पीढ़ी तैयार करने में कार्यरत है। संगठन द्वारा प्रशिक्षित स्कॉलर्स एवं लीडर्स विश्व के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों से अब तक ₹300 करोड़ से भी अधिक की छात्रवृत्ति प्राप्त कर चुके हैं। 

साल 2008 में 16 वर्ष की आयु में शरद विवेक सागर ने राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की। पिछले दो दशकों में संगठन से प्रशिक्षित युवाओं ने 50 से अधिक देशों और 5 महाद्वीपों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, संयुक्त राष्ट्र एवं अन्य महत्वपूर्ण अंतर-राष्ट्रीय पटलों पर युवा राजदूतों के रूप में भारत को आगे रखा है, 5,000 से भी अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर-राष्ट्रीय पुरस्कार एवं प्रतियोगिताओं में विजय प्राप्त की है, 1,000 से भी अधिक सामाजिक परियोजनाओं का सृजन किया है और भारत के दूर-दराज़ के क्षेत्रों में सेवक नेतृत्व का उदाहरण बने हैं। अक्टूबर 2024 में डेक्सटेरिटी ग्लोबल को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन द्वारा व्हाइट हाउस आमंत्रित किया गया। डेक्सटेरिटी ग्लोबल के ग्रेजुएट्स और फेलोज़ का प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी स्वतंत्रता के बाद किसी भी विदेशी देश से व्हाइट हाउस में आमंत्रित युवा स्कॉलर्स एवं लीडर्स का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल था।

छात्रवृत्ति का विवरण

श्रेया को भेजे गए आधिकारिक स्वीकृति पत्र में सेंटर कॉलेज के नामांकन प्रबंधन के उपाध्यक्ष चैड स्पेंसर तथा लिंकन स्कॉलर्स प्रोग्राम के निदेशक डॉ. रॉबर्ट शैलकॉफ ने लिखा, "बधाई हो, श्रेया! हमें अत्यंत प्रसन्नता है कि आप लिंकन स्कॉलर के रूप में चयनित हुई हैं और अपनी उच्च शिक्षा की यात्रा प्रारंभ कर रही हैं। लिंकन स्कॉलर के रूप में आपकी छात्रवृत्ति आपके चारों वर्षों की पढ़ाई का संपूर्ण व्यय वहन करेगी।" लिंकन स्कॉलरशिप विश्व की अत्यंत प्रतिष्ठित छात्रवृत्तियों में से एक है, जो दुनिया भर से ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रदान की जाती है "जो अपने कार्य, नेतृत्व और जनसेवा के माध्यम से दुनिया को बेहतर बनाने का संकल्प रखते हैं।"

श्रेया का कथन

प्रतिष्ठित लिंकन स्कॉलरशिप प्राप्त होने पर श्रेया ने कहा, "मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के सम्मान में स्थापित छात्रवृत्ति प्राप्त होगी। यह मेरे लिए अविश्वसनीय है। बिहार के एक छोटे से गाँव में जन्म लेकर सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा के लिए यह सपना लगभग असंभव था। 13 वर्ष की आयु में मेरा परिचय डेक्सटेरिटी ग्लोबल नामक संगठन से हुआ और वहाँ प्राप्त प्रशिक्षण ने मेरे जीवन की दिशा ही बदल दी। उसी वर्ष मैंने डेक्सटेरिटी स्कूल ऑफ लीडरशिप एंड एंटरप्रेन्योरशिप (डेक्सस्कूल) से प्रशिक्षण लिया और फिर "डेक्सटेरिटी टू कॉलेज" फेलो के रूप में चयनित हुई। 

डेक्सटेरिटी ने मुझे परिस्थितियों से आगे बढ़कर सपने देखने का साहस दिया और उन्हें साकार करने के लिए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और निरंतर सहयोग प्रदान किया। इसके बाद मैंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त की और अब यह प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति हासिल की है। मेरी कोशिश रहेगी कि मैं राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के आदर्शों पर चलूँ, अपनी शिक्षा का उपयोग महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान के लिए करूँ और भारत की सेवा करूँ।

डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक का कथन

डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री शरद विवेक सागर ने कहा, "वर्ष 2008 से डेक्सटेरिटी साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले किशोरों एवं युवाओं की पहचान कर उन्हें असाधारण अवसरों के लिए कठोर एवं विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दे रही है। हमारा उद्देश्य एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो भारत को उसकी सर्वोच्च गौरव तक पहुँचाने में योगदान दें। एक सरकारी विद्यालय की छात्रा से अमेरिका की लिंकन स्कॉलर बनने तक श्रेया की यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को अवसर और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, तो वे भी वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं। किसी भारतीय छात्रा का राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के नाम पर स्थापित छात्रवृत्ति प्राप्त करना गर्व का विषय है। यह सफलता पिछले दो दशकों में डेक्सटेरिटी द्वारा निर्मित एक विश्वस्तरीय प्रणाली का परिणाम है।”