राज्य के सीतामढ़ी जिले से बेहद भावुक करने वाली खबर है। यहां हॉस्पिटल में एडमिट पिता की सांसें तब थम गयी, जब उन्होंने अपनी बेटी की डोली को उठते हुए देखा। नियति के इस अनोखे खेल को जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गयी। एक ही वक्त पर विदाई और विछोह के इस खबर की हर तरफ चर्चा हो रही है।
हर पिता के दिल की सबसे बडी ख्वाहिश यही होती है कि वह अपने अपनी प्राण से प्यारी बेटी को शादी के बाद हंसी खुशी विदा करे। लेकिन सीतामढी के इस पिता के लिए नियति ने कुछ और ही तय कर रखा था। जिले के सोनबरसा बस स्टैंड निवासी लालबाबू महतो के साथ नियति ने ऐसा दर्दनाक खेल खेला, जो शायद अबतक किसी के साथ नहीं हुआ होगा। लालबाबू महतो की बेटी की शादी के बाद जैसे ही उसकी डोली उठी, पिता ने दम तोड दिया, उनकी सांसे थम गयी। पिता ने अपनी बेटी की शादी को अस्पताल में बेड पर लेट कर देखा। मिली खबर के अनुसार, लालबाबू महतो लंबे समय तक एक बस में कंडक्टर के रूप में कार्यरत रहे। उन्होंने अपनी इसी कमाई से अपने परिवार का पालन-पोषण किया। उनकी सबसे छोटी पुत्री निधि कुमारी की शादी सीतामढ़ी जिले के मोहनपुर निवासी युवक के साथ पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम से संपन्न हुई। बताया जा रहा है कि शादी से तीन दिन पहले लालबाबू महतो की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उनके साथ पत्नी मीनू देवी और पुत्र राजेश मौजूद थे।
बेटी की शादी की तारीख पहले से ही तय तारीख में संपन्न हुई। इस दौरान अन्य परिजनों और रिश्तेदारों ने रस्मों को पूरा किया। वहीं लखनउ के अस्पताल में एडमिट लालबाबू महतो ने मोबाइल फोन पर वीडियो कॉल के जरिए उन्होंने बेटी की हल्दी, वरमाला और विवाह की सभी प्रमुख रस्में देखीं। सुबह जब बेटी की विदाई की बेला हुई, तब पिता की आंखों से भी आंसुओं की धार बह निकली। अस्पताल के कमरे में मौजूद पत्नी और बेटे के साथ उन्होंने अपनी लाडली बेटी को अपने ससुराल विदा होते देखा। बताया जाता है कि बेटी की विदाई के कुछ ही देर बाद लालबाबू महतो ने अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। एक ओर बेटी अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए ससुराल रवाना हो रही थी, वहीं दूसरी ओर पिता इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह रहे थे। यह दृश्य इतना भावुक था कि अस्पताल का माहौल भी गमगीन हो गया। पत्नी मीनू देवी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और पुत्र राजेश ने एक ही दिन में अपनी बहन की विदाई और पिता का बिछोह दोनों देखा।
मिली खबर के अनुसार लालबाबु महतो के परिवार में पत्नी और तीन पत्र तथा दो पुत्रियां हैं। इस हृदयविदारक घटना के बारे में पूरे सोनबरसा इलाके में जिसने भी सुना वह भावुक हो उठा। लोग इसे पिता और पुत्री के स्नेह का अमूल्य उदाहरण बता रहे हैं साथ ही एक पिता के अपनी बेटी के प्रति असीम प्रेम और नियति के क्रूर फैसले की भी बात कह रहे हैं।