रोहतास : अगलगी की बढ़ती घटनाओं के बीच गुरुवार की रात एनएच-19 पर एक यात्री बस आग की चपेट में आने से बाल-बाल बच गई। घोरघट गेट के समीप रांची से दिल्ली जा रही विजय रथ नामक बस के पिछले हिस्से से अचानक धुआं उठने लगा। इससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, चालक की सूझबूझ और तत्परता से बड़ा हादसा टल गया। चालक ने तत्काल बस को सड़क किनारे रोककर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बस अपने गंतव्य की ओर जा रही थी, इसी दौरान पिछले हिस्से से धुआं निकलता देख यात्रियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया
बताया जाता है कि बस अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। इसी दौरान पिछले हिस्से से धुआं निकलता देख यात्रियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चालक ने बिना देर किए बस रोक दी। इसके बाद यात्रियों के साथ उनके सामान को भी बाहर निकाल लिया गया। आग से बस को मामूली नुकसान पहुंचा। थानाध्यक्ष रितेश कुमार सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और अग्निशमन विभाग को सूचित किया। दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। सभी यात्री सुरक्षित हैं।
आग की घटनाओं से देशभर में चिंता
मार्च 2026 के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हुई अगलगी की घटनाओं ने एक बार फिर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बिहार में भी अप्रैल में पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग और पटना आर्केड बिजनेस कॉलेज में आग लगने की घटनाएं हुईं। मई में मोतिहारी की एक थोक किराना दुकान में लगी आग में दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, जून में मुजफ्फरपुर के निजी प्रसाद अस्पताल के आइसीयू में लगी आग से पांच मरीजों की जान चली गई।
बिहार के बाहर भी स्थिति चिंताजनक रही
बिहार के बाहर भी स्थिति चिंताजनक रही। मार्च में ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज के ट्रामा केयर आइसीयू में आग लगने से 10 मरीजों की मौत हुई। दिल्ली के पालम इलाके में मार्च में एक आवासीय भवन में अगलगी से नौ लोगों की जान गई। अप्रैल में तमिलनाडु के विरुधुनगर स्थित पटाखा फैक्ट्री में आग और विस्फोट से 25 लोगों की मौत हुई, जबकि जून में दिल्ली के मालवीय नगर की एक इमारत में लगी आग ने 21 लोगों की जान ले ली।
ज्योतिषीय मान्यता के नजरिये से भी चर्चा
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वर्ष 2026 को मंगल प्रधान वर्ष माना जा रहा है। मंगल को अग्नि, ऊर्जा और साहस का कारक ग्रह माना जाता है। इस मान्यता के आधार पर मार्च से अग्नि संबंधी घटनाओं में वृद्धि को मंगल के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, वर्ष की अध्यक्षता गुरु के हाथ में होने की पारंपरिक ज्योतिषीय व्याख्या के अनुसार, राहत, बचाव और नुकसान को सीमित रखने वाले सकारात्मक प्रभाव की भी चर्चा की जा रही है। हालांकि, ग्रहों की स्थिति और अगलगी की घटनाओं के बीच कोई वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित संबंध नहीं है। इन घटनाओं के वास्तविक कारणों की पड़ताल तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों के आधार पर ही की जानी चाहिए।