संयुक्त राष्ट्र में गूंजी जमुई की आवाज, सांसद अरुण भारती ने शांति निर्माण पर रखा भारत का पक्ष

जमुई सांसद अरुण भारती ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के ECOSOC चैंबर में संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग (PBC) और अफ़्रीकी संघ शांति एवं सुरक्षा परिषद (AU PSC) की नौवीं वार्षिक परामर्श बैठक में भारत का आधिकारिक वक्तव्य प्रस्तुत किया

न्यूयॉर्क। जमुई (बिहार) से लोकसभा सांसद एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संसदीय दल के मुख्य सचेतक अरुण भारती ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के ECOSOC चैंबर में संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग (PBC) और अफ़्रीकी संघ शांति एवं सुरक्षा परिषद (AU PSC) की नौवीं वार्षिक परामर्श बैठक में भारत का आधिकारिक वक्तव्य प्रस्तुत किया। भारती संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के लिए भारत के गैर-आधिकारिक संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में 19 से 23 अक्टूबर तक न्यूयॉर्क के दौरे पर हैं।

अपने वक्तव्य की शुरुआत में अरुण भारती ने इस परामर्श बैठक के आयोजन के लिए शांति निर्माण आयोग और अफ़्रीकी संघ शांति एवं सुरक्षा परिषद के अध्यक्षों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बैठक आपसी सहयोग, समझ और अफ़्रीकी स्वामित्व व नेतृत्व को मज़बूत करने तथा राष्ट्रीय स्तर पर संचालित शांति-निर्माण प्रयासों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने 2025 की शांति निर्माण संरचना समीक्षा (Peacebuilding Architecture Review) के जुड़वाँ प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रस्तावों ने दोनों संस्थाओं के बीच रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करने और वार्षिक परामर्शों की सिफ़ारिशों पर अनुवर्ती कार्रवाई के लिए एक तंत्र बनाने का आह्वान किया था, और आज का संयुक्त विज्ञप्ति (Joint Communiqué) उसी दिशा में अगला कदम है।

अरुण भारती ने संयुक्त क्षेत्रीय दौरों तथा किसी देश-विशेष के संदर्भ में सहयोग जैसी प्रस्तावित व्यावहारिक व्यवस्थाओं पर भारत का दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि ऐसी सभी सहयोगी व्यवस्थाएँ लचीली हों, दोनों संस्थाओं के अपने-अपने अधिदेशों का सम्मान करें और पूरी तरह संबंधित देश की प्राथमिकताओं के अनुरूप हों। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि शांति निर्माण में "राष्ट्रीय स्वामित्व" सर्वोपरि सिद्धांत होना चाहिए। शांति निर्माण की ज़रूरतों और प्राथमिकताओं को तय करने की प्राथमिक ज़िम्मेदारी संबंधित देश की सरकार की है। इसलिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहायता माँग-आधारित होनी चाहिए, जो मेज़बान देश के अनुरोध और सहमति से दी जाए, उसकी प्राथमिकताओं के अनुरूप हो, और राष्ट्रीय प्रयासों की पूरक बने, कभी उनका विकल्प नहीं। उन्होंने कहा कि यही सिद्धांत संयुक्त गतिविधियों और क्षेत्रीय दौरों पर भी समान रूप से लागू होता है।

वित्तपोषण के विषय पर श्री भारती ने संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण कोष, अफ़्रीकी विकास बैंक और अन्य साझेदारों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई, ताकि प्रयासों में बिखराव न हो और बाहर से थोपे गए दृष्टिकोणों से बचा जा सके।समावेशी विकास और सामाजिक न्याय के प्रश्न को रेखांकित करते हुए श्री भारती ने कहा कि शांति तभी टिकाऊ होती है जब वह समावेशी हो। उन्होंने संयुक्त विज्ञप्ति में शांति निर्माण में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को मिली मान्यता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज मानव-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की क्षमता रखती है, जिससे जनता का भरोसा और संस्थाओं की मज़बूती बढ़ती है, और अंततः स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त होता है। उल्लेखनीय है कि भारत ने आधार, यूपीआई और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाने में विश्व स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत किया है।

अपने वक्तव्य के समापन में अरुण भारती ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण "वसुधैव कुटुम्बकम्" - अर्थात् पूरा विश्व एक परिवार है - की सभ्यतागत भावना से निर्देशित है। उन्होंने कहा कि भारत ने भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से क्षमता निर्माण सहित माँग-आधारित साझेदारियों का समर्थन किया है, और भारत अपने अफ़्रीकी साझेदारों की राष्ट्रीय शांति-निर्माण प्राथमिकताओं के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है।

वक्तव्य के बाद जूमि सांसद ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र जैसे विश्व मंच पर भारत की बात रखना मेरे लिए गर्व और सम्मान का क्षण है। यह जमुई की जनता के आशीर्वाद का परिणाम है। आदरणीय रामविलास पासवान जी ने जीवन भर समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए संघर्ष किया, और आज समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की वही बात विश्व मंच पर रखने का अवसर मिला। इसके लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चिराग पासवान जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।"

ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सांसदों के प्रतिनिधिमंडल भेजने की परंपरा को पुनर्जीवित किया है, जिसके तहत विभिन्न दलों और क्षेत्रों के सांसद भारत के संसदीय लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अपने दौरे के दौरान श्री भारती संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अधिकारियों, अन्य देशों के स्थायी प्रतिनिधियों और भारतीय प्रवासी समुदाय से भी मुलाकात कर रहे हैं।