बिहार के समस्तीपुर के एक सरकारी विद्यालय से गुरु-शिष्य रिश्ते का एक भावुक पल सामने आया है, जहां शिक्षिका के ट्रांसफर पर बच्चे फूट-फूटकर रोने लगे। जैसे ही बच्चों को अपनी प्रिय शिक्षिका के सरप्लस स्थानांतरण की जानकारी मिली, पूरा विद्यालय सिसकियों में डूब गया। बच्चे अपनी शिक्षिका से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगे। यह दृश्य देख स्कूल में मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गई।
दरअसल हसनपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, मल्हीपुर की सहायक शिक्षिका भारती सुमन का सरप्लस स्थानांतरण हुआ। ट्रांसफर की खबर फैलते ही सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपनी प्रिय शिक्षिका से लिपटकर रोने लगे। कोई उनका हाथ पकड़कर रुकने की गुहार लगा रहा था, तो कोई आंसुओं के बीच अपने जज़्बात बयां कर रहा था। बताया जा रहा है कि भारती सुमन पिछले 23 वर्षों से इसी विद्यालय में बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। इन वर्षों में उनसे बच्चों का गहरा लगाव हो गया था। बच्चों ने उन्हें केवल शिक्षिका नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य जैसा प्यार और सम्मान दिया। जब विदाई की घड़ी आई, तो आंसुओं ने सब कुछ कह दिया।
यह पल एक ऐसे गुरु और शिष्य के रिश्ते की मिसाल थी, जो वर्षों के विश्वास, स्नेह और समर्पण से बना था। शिक्षिका ने स्कूल के बच्चों को सिर्फ पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्य और जीवन जीने की सीख भी दी। ऐसे में जब विदाई की घडी आई तो विद्यालय का हर कोना भावुक हो उठा। बच्चों की आंखों से बहते आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि एक सच्चा शिक्षक अपने विद्यार्थियों के दिलों में कितनी गहरी जगह बना सकता है।
आज के दौर में, जब गुरु-शिष्य संबंधों पर अक्सर सवाल उठते हैं, मल्हीपुर विद्यालय की यह तस्वीर एक प्रेरणादायी संदेश देती है। यह दिखाती है कि समर्पण और स्नेह के साथ पढ़ाने वाला शिक्षक विद्यार्थियों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना लेता है। इसलिए तो जब शिक्षिका स्कूल से विदा लेने लगी तो सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपनी प्रिय शिक्षिका से लिपटकर रोने लगे।