बिहार में शिक्षा विभाग ने अब तक हुई शिक्षक नियुक्तियों की व्यापक और गहन जांच का फैसला किया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से तीन चरणों—TRE 1, TRE 2 और TRE 3—में हुई नियुक्तियों के बाद विभाग ने सभी चयनित शिक्षकों के शैक्षणिक, प्रशिक्षण और अनुभव प्रमाणपत्रों का सत्यापन अनिवार्य कर दिया है
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन कुमार ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर एक महीने के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। यदि किसी शिक्षक के दस्तावेज में फर्जीवाड़ा पाया जाता है, तो उनकी नियुक्ति रद्द करने के साथ-साथ अब तक प्राप्त वेतन की वसूली भी की जाएगी।
राज्य में प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अब तक लगभग 2.68 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है।
नए आदेश के अनुसार, शिक्षकों के निम्न दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र (B.Ed, D.El.Ed, BSc आदि, शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र,अनुभव प्रमाणपत्र, जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र दिव्यांगता प्रमाणपत्र (यदि लागू हो) अन्य आवश्यक दस्तावेज। अब DEO को हर एक अभ्यर्थी के दस्तावेजों का सत्यापन कर रिपोर्ट एक महीने में विभाग को भेजना होगा।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जाली या गलत प्रमाणपत्र पाए जाने पर तत्काल नियुक्ति रद्द होगी।अब तक प्राप्त वेतन वापस वसूला जाएगा।इसके साथ ही फर्जीवाड़े के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम राज्य में योग्य और पारदर्शी शिक्षक नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। पहले भी सामने आए थे फर्जीवाड़े के मामले थे। इसके बाद अब यह निर्णय लिया गया है।