इलेक्ट्रिक वाहन के प्रति लगातार बढ रहा रूझान, पांच सालों में हुआ बंपर उछाल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Sujeet Kumar
Updated at : Jun 27, 2026, 5:08:00 PM

विश्व स्तर पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत और महंगाई के बीच बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने का सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पांच वर्षों में ईवी की खरीद में लगभग 10 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में जहां ईवी की संख्या 12,400 के करीब थी, वहीं बीते वर्ष करीब एक लाख 23 हजार के आंकड़ें को छू चुकी है। इस दौरान राज्य में निबंधित कुल 81 लाख 68 हजार वाहनों में से लगभग 6 प्रतिशत यानी चार लाख 83 हजार ईवी हैं। यह आंकड़ा न केवल बिहार की बदलती परिवहन संस्कृति को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हो रहा है। 

वर्ष 2021 में ईवी के निबंधन में 85.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और आंकड़ा 23 हजार के पार पहुंच गया। 2022 में भी इसमें भारी उछाल आया और संख्या 55,700 से अधिक हो गई। वर्ष 2023 में राज्य सरकार की ओर से ईवी नीति लागू होने के बाद यह आंकड़ा करीब 90 हजार पहुंच गया। वर्ष 2024 में संख्या बढ़कर एक लाख 12 हजार से अधिक हो गई। चालू वर्ष 2026 में अब तक राज्यभर में आठ लाख वाहन पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें ईवी की संख्या करीब 68 हजार है।परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने इस बदलते ट्रेंड को पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक ईवी को अपना रहा है। यह ट्रेंड पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वायु प्रदूषण कम होगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और स्वच्छ ऊर्जा से आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ वातावरण मिलेगा। राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। यदि यह वृद्धि दर बनी रही तो हम  2030 तक ईवी अपनाने वाले शीर्ष राज्यों में शामिल हो सकते है। आम नागरिकों से अपील है कि वे पर्यावरण अनुकूल परिवहन के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि ईवी को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (संशोधन) नीति, 2026 लागू की गई है। इसके अंतर्गत ‘पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना’ चल रही है, जिसमें दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया ईवी खरीदने पर अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही, प्रदेशभर में सार्वजनिक, निजी और व्यावसायिक संस्थानों में ईवी चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क विकसित करने के लिए भी अलग से अनुदान का प्रावधान है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर समेत प्रमुख शहरों में चार्जिंग स्टेशन तेजी से लगाए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में राज्य में कम से कम 500 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं।