बिहार के पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। तेज प्रताप को पटना पुलिस ने देर रात गिरफ्तार कर 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया यानी न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा के मामले में पटना पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
पुलिस का दावा है कि रामगुलाम चौक पर प्रदर्शन के दौरान तेजप्रताप यादव ने छात्रों को हिंसा के लिए उकसाया था। इस कार्रवाई के तहत अकेले पटना से 209 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार को दिन में गांधी मैदान पुलिस ने तेज प्रताप यादव को सबसे पहले हिरासत में लिया था, लेकिन कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए उन्हें कुछ देर में छोड़ दिया गया।
हालांकि, देर शाम जब तेज प्रताप सिटी सेंटर मॉल घूमने निकले तो एसपी लॉ एंड ऑर्डर की मौजूदगी में पुलिस ने उन्हें दोबारा पकड़ लिया। पुलिस उन्हें एसपी की गाड़ी से दीघा थाने और बाद में नौबतपुर थाने ले गई, जहां देर रात तक पूछताछ जारी रही। फिर उनकी गिरफ्तारी हुई। देर रात को ही छज्जू बाग स्थित जज के आवास पर पेशी हुई और देर रात को ही पटना के बेऊर जेल भेज दिया गया।
तेज प्रताप यादव के वकील जगन्नाथ सिंह के मुताबिक उन पर IPC की धारा 307 यानी हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है। वकील का कहना है कि जब वह गिरफ्तारी की वजह पूछने नौबतपुर थाने पहुंचे तो उन्हें तत्काल FIR की कॉपी तक नहीं दी गई। उनके मुताबिक पुलिस की ओर से पहले गांधी मैदान से FIR आने की बात कही गई।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शन स्थल के CCTV फुटेज की समीक्षा की और कथित तौर पर तेज प्रताप की भूमिका को लेकर कुछ सबूत मिलने का दावा किया। पुलिस की कार्रवाई को प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पुलिस की ओर से आरोपों का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
बताया जा रहा है कि शाम के समय जब तेज प्रताप यादव पटना के एक मॉल में मौजूद थे, तभी पटना पुलिस के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे और उन्हें गिरफ्तार कर अपने साथ ले गए। गिरफ्तारी के बाद तेज प्रताप यादव को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था और कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उन्हें पटना के बेऊर जेल भेज दिया गया।