2006 से 2015 तक नियुक्त शिक्षकों की होगी जांच, फर्जी मिला तो जाएगी नौकरी

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे 72,287 शिक्षकों के जाति, आधार, आय, मार्कशीट और निर्धारित योग्यता से जुड़े प्रमाण पत्रों की जांच होगी। यह जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो करेगा।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Dec 18, 2025, 9:37:00 AM

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे 72,287 शिक्षकों के जाति, आधार, आय, मार्कशीट और निर्धारित योग्यता से जुड़े प्रमाण पत्रों की जांच होगी। यह जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो करेगा। फर्जी प्रमाण पत्र पाए जाने पर शिक्षक को नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा। अब तक मिली पूरी सैलरी की व्याज सहित वसूली होगी। साथ ही फर्जीवाड़े का केस दर्ज होगा। शिक्षा विभाग शिक्षकों के प्रमाण पत्र की जांच कर रहा है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो 2006 से 2015 के बीच नियुक्त नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच करेगा। इसमें शैक्षिक, प्रशिक्षण और जाति प्रमाण पत्र शामिल हैं। प्रमाण पत्रों का मिलान संबंधित राज्य, जिला, बोर्ड और विश्वविद्यालय से कराया जाएगा। सबसे अधिक 53,894 शिक्षकों की हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट व प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए हैं। शेष 18,393 शिक्षकों के बीएड, बीटीसी, बीए, दिव्यांग और जाति सहित अन्य प्रमाण पत्रों की जांच होगी।

जांच में बिहार बोर्ड के 46,681 प्रमाण पत्र शामिल हैं। संस्कृत बोर्ड के 1,763 व मदरसा बोर्ड के 5,450 प्रमाण पत्र हैं। तिलका मांझी विवि, भागलपुर के 666 प्रमाण पत्र संदिग्ध हैं। मगध विवि, बोधगया के 4,924 और नालंदा खुला विश्वविद्यालय, पटना के 114 प्रमाण पत्र हैं। पीयू के 383 और वीर कुंवर सिंह विवि, आरा के 2,296 प्रमाण पत्र जांच में हैं। ललित नारायण मिथिला विवि, दरभंगा के 2.934 व दूरस्थ शिक्षा के 882 प्रमाण पत्र हैं। कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के 395 प्रमाण पत्र हैं। जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के 395 और बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के 1,902 प्रमाण पत्र हैं। बीएन मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के करीब 2,000 प्रमाण पत्र भी संदिग्ध हैं।

शिक्षा विभाग अब तक 7 बार विभागीय स्तर पर जांच कर चुका है। फिर भी वास्तविकता सामने नहीं आई। कई मामलों में जाति और शैक्षिक प्रमाण पत्र संदिग्ध मिले। विभागीय लापरवाही के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। अब यह जिम्मेदारी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को दी गई है। सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सहयोग के निर्देश दिए गए हैं।

फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर 40 हजार से अधिक शिक्षक राज्यकर्मी बन चुके हैं। इनमें सक्षमता परीक्षा और टीआरई-1, 2 व 3 पास शिक्षक शामिल हैं। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो जिलों से रिकॉर्ड मांगकर जांच कर रहा है। राज्यकर्मी शिक्षक भी यदि फर्जी पाए गए तो उनकी नौकरी समाप्त होगी। सैलरी और अन्य सुविधाओं की राशि की भी रिकवरी होगी

बिहार में 81 हजार स्कूलों में 5.80 लाख शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें टीआरई 1, 2 और 3 के साथ ही सक्षमता परीक्षा पास शिक्षक भी नियुक्त किए गए है। 2006 से 2016 के बीच 3.68 लाख नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इनमें से सक्षमता परीक्षा पास कर करीब 2.60 लाख शिक्षक राज्यकर्मी बने हैं। शेष शिक्षकों के लिए परीक्षा आयोजित की जारही है।