बिहार में नई सरकार की स्क्रिप्ट तैयार, जदयू की बैठक में होगा फैसला

बिहार में नई सरकार की स्क्रिप्ट तैयार, जदयू की बैठक में होगा फैसला

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 08, 2026, 1:07:00 PM

बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आने की संभावना जताई जा रही है। राज्य के जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने संकेत दिए हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस घटनाक्रम ने प्रदेश में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।

विजय चौधरी के अनुसार, मुख्यमंत्री 9 अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके तुरंत बाद उनके पद छोड़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दल एक साथ बैठकर नए नेतृत्व पर निर्णय लेंगे और सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इसी बीच, निर्धारित कैबिनेट बैठक को रद्द कर दिया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल और बढ़ गई है। जानकारी के मुताबिक, 9 अप्रैल को दिल्ली में जदयू की एक अहम बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता शामिल होंगे। इस बैठक में सत्ता परिवर्तन, नए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नामों के साथ-साथ सरकार में जदयू की भूमिका को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। खुद नीतीश कुमार, जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, इस रणनीतिक चर्चा का नेतृत्व करेंगे। माना जा रहा है कि यह बैठक बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगी।

सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात हो सकती है। इस दौरान राज्य की नई सरकार के स्वरूप और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।

यदि यह घटनाक्रम तय समय के अनुसार आगे बढ़ता है, तो 13 अप्रैल के आसपास नीतीश कुमार के इस्तीफे की औपचारिक घोषणा हो सकती है और 16 अप्रैल तक बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राज्यसभा सदस्य बनने के साथ ही नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानमंडल के सभी सदनों की सदस्यता हासिल की है। यह उनके राजनीतिक जीवन का एक उल्लेखनीय पड़ाव माना जा रहा है।