सरस मेला में 6 दिन में लगभग 2 करोड़ रूपये का व्यवसाय, भारी बारिश के बीच खरीददारी का जुनून जारी

मौसम की बाधा के बावजूद सरस मेला के प्रति लोगों का क्रेज देखते ही बन रहा है। आयोजन के 6वें दिन शुक्रवार को भारी बारिश के बावजूद 32 लाख 64 हजार रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री हुई है। सरस मेला के आयोजन के छह दिनों में लगभग 2 करोड़ रुपये का व्यवसाय हुआ है

भारी बारिश के बीच भी पटना वासियों के कदम ज्ञान भवन की तरफ ही रुख कर रहे हैं। मौसम की बाधा के बावजूद सरस मेला के प्रति लोगों का क्रेज देखते ही बन रहा है। जहां सदियों पुरानी शिल्प और कलाकृतियां पुनर्जीवित हुई हैं, वहीं क्रेता और विक्रेता भी एक-दूसरे की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो रहे हैं।

विलुप्तता के दौर से बाहर निकलकर हस्तशिल्प, लोककला और पारंपरिक व्यंजन अब एक बड़े बाजार में अपनी पहुंच बना रहे हैं और फिर से अपने खोए हुए सम्मान को हासिल कर रहे हैं। साथ ही उन उत्पादों को वाजिब दाम भी मिल रहा है, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमियों के चेहरे पर खुशी है।

बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के निर्देशन में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) द्वारा ज्ञान भवन, पटना में 29 सितंबर 2026 तक आयोजित है। सरस मेला में हमारे देश के 15 राज्यों की लोक कलाओं और हस्तशिल्प को बड़ा बाजार मिला है। 

हरेक स्टॉल पर हुनरमंद महिलाओं के सफलता और कुशल उद्यमी बनने के साथ ही सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने की गाथा प्रदर्शित है। घर-दुकान के जरूरत की हरेक वस्तुओं और व्यंजनों की जमकर खरीद-बिक्री हो रही है।

आयोजन के 6वें दिन शुक्रवार को भारी बारिश के बावजूद 32 लाख 64 हजार रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री हुई है। शनिवार को यह आंकड़ा 50 लाख रुपये पार कर जाने की उम्मीद है। सरस मेला के आयोजन के छह दिनों में लगभग 2 करोड़ रुपये का व्यवसाय हुआ है। 

बड़ी संख्या में खरीददारी और लोगों का आगमन सरस मेला के प्रति लोगों के क्रेज को प्रदर्शित कर रहा है।तभी तो देश के कई बड़े हस्तशिल्प के व्यापारी भी सरस मेला में आ रहे हैं और महिला उद्यमियों से रूबरू होकर उनके द्वारा निर्मित उत्पादों के प्रति अपना सकारात्मक रुख स्पष्ट कर रहे हैं और भविष्य के लिए बड़े ऑर्डर की बात कर रहे हैं।

जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग संस्था के तत्वावधान में आयोजित क्रेता-विक्रेता संवाद में बड़े क्रेताओं और विक्रेताओं के बीच प्रतिदिन संवाद हो रहा है। यह संवाद ग्रामीण उत्पादों को कॉर्पोरेट बाजार से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। 

शनिवार को पुनः बम्बू लेडी ऑफ इंडिया के उपनाम से लोकप्रिय असम की नीरा मुनी शर्मा ने बिहार की जीविका दीदियों के साथ बांस और सिक्की से बने उत्पादों और कलाकृतियों को लेकर विस्तृत संवाद किया। उन्होंने उत्पादों के मूल्य निर्धारण, फिनिशिंग और वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप डिजाइन का गुर सिखाया। इसी तरह तमिलनाडु के टी स्टेट ओनर विजय जैन ने भी चाय उत्पादक जीविका दीदियों से संवाद किया और चाय की पत्ती की गुणवत्ता, उसकी तुड़ाई, प्रोसेसिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर अपना महत्वपूर्ण सुझाव दिया।

सरस मेला के हरेक स्टॉल से डिजिटल खरीददारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं रुपये की जमा-निकासी के लिए परिसर में ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित किया जा रहा है। इस केंद्र से प्रतिदिन 80 हजार से 1 लाख रुपये की जमा-निकासी हो रही है, जिससे ग्राहकों को नकद की कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

सरस मेला का समापन 29 सितंबर को होना है। अब समय कम रह गया है, लिहाजा लोग जमकर खरीददारी कर रहे हैं। खरीददारी का जुनून और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति लोगों की दीवानगी में बारिश भी बाधक नहीं बनी है।