पटना-सरस मेला अब समापन की ओर रुख कर चुका है। 20 सितंबर 2026 से जारी इस महामेले का 29 सितंबर को समापन होने वाला है। लिहाजा शिल्प, स्वाद और कलाकृतियों के शौकीन जमकर खरीददारी कर रहे हैं।
रविवार को भी खरीददारों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ। छुट्टी का दिन और सरस मेले के समापन के महज दो दिन शेष रहने के कारण लोगों ने जमकर खरीददारी की और देशी व्यंजनों का लुत्फ उठाया। ज्ञान भवन परिसर सुबह से ही खचाखच भरा रहा।
मेला में देश के विभिन्न प्रदेशों की लोककलाओं पर आधारित परिधानों की खूब मांग है। बावनबूटी, सिक्की कला, सुजनी, काथा, भरवा कला से बने परिधानों की जमकर बिक्री हुई। सारण जिला के दिघवारा प्रखंड से आई रीता देवी इस बार के मेले की स्टार उद्यमियों में से एक बन गई हैं। रीता देवी ने अकेले एक लाख रुपये से अधिक की कुर्ती और सलवार सूट की बिक्री की है।
रीता देवी श्याम जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। जीविका के सहयोग से इन्हें अपने परिधानों की बिक्री के लिए सरस मेला जैसा बड़ा राष्ट्रीय प्लेटफार्म मिला है। रीता देवी ने मायके से मिली सिलाई मशीन और मां से मिले हुनर को स्वरोजगार से जोड़ा। उन्होंने अपनी मिनी परिधान फैक्ट्री में 18 जीविका दीदियों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है।
रीता देवी की सबसे बड़ी खासियत है कि वे कपड़ों के कतरन से भी उत्पाद बनाती हैं। उन्होंने सुजनी, काथा, गुदरी और भरवा कला को कुर्ती और सलवार सूट पर बखूबी उकेरा है और इसी तरह के परिधानों की मांग सरस मेला में सबसे ज्यादा है। लोक कलाओं से उकेरी गई परिधानों और उत्पादों की जमकर बिक्री हो रही है।
सात दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा ढाई करोड़ रुपये पार कर गया है। यह आंकड़ा स्टॉल धारकों से लिए गए बिक्री रिपोर्ट पर आधारित है। रविवार तक तीन लाख से अधिक लोगों का मेले में पदार्पण हो चुका है। सरस मेला में क्रेता और विक्रेताओं के बीच हस्तशिल्प, लोककला और उत्पादों के प्रति क्रेज देखते ही बना।
रविवार को भी जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग संस्था के तत्वावधान में क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम जारी रहा। महिला उद्यमियों द्वारा उत्पादित शिल्प और व्यंजनों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन पर बाजार के विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी और मेले में आई विक्रेताओं को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे लोककला आधारित परिधानों को ब्रांड बनाकर बड़े बाजार में उतारा जा सकता है। सरस मेला के सभी 135 स्टॉल आकर्षण के खास केंद्र बने हुए हैं। इनमें से फूड एरिया के 17 स्टॉलों पर भी देशी व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए लंबी कतारें लग रही है।
देश के एक बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित कर जीविका ने कुशल प्रबंधन की भी बानगी पेश की है। स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं सहायता केंद्र, सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और आगंतुकों के लिए बैठने-पीने की व्यवस्था की सभी ने सराहना की है। मेला 29 सितंबर तक चलेगा, लिहाजा हस्तशिल्प के कद्रदान अपनी सतरंगी विरासत को देखने और खरीददारी का अंतिम अवसर चूकना नहीं चाहते हैं।