नई ट्रांसफर पॉलिसी की तैयारी: अब छात्र-शिक्षक अनुपात तय करेगा शिक्षकों का तबादला

बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत लाखों शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है. राज्य सरकार अब शिक्षकों के स्थानांतरण (ट्रांसफर) की प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने जा रही है

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Mar 21, 2026, 12:59:00 PM

बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत लाखों शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है. राज्य सरकार अब शिक्षकों के स्थानांतरण (ट्रांसफर) की प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने जा रही है. इसके लिए नई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें पहली बार ‘शिक्षक-छात्र अनुपात’ को आधार बनाया जाएगा. इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है.

नई नीति लागू होने के बाद राज्य के करीब 5.87 लाख शिक्षकों के स्थानांतरण पर इसका सीधा असर पड़ेगा. यह व्यवस्था बिहार के 71 हजार प्रारंभिक स्कूलों और 9360 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में लागू की जाएगी.

नई व्यवस्था के तहत हर स्कूल में शिक्षकों की संख्या तय करने के लिए ‘मानक मंडल’ बनाया जाएगा. इसी मानक के आधार पर यह तय होगा कि किस स्कूल में कितने शिक्षक होने चाहिए और उसी के अनुसार ट्रांसफर किया जाएगा. इस प्रक्रिया को ‘समानुपातिकरण’ कहा जा रहा है, जिससे सभी स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित होगा.

राज्य सरकार ने नई ट्रांसफर पॉलिसी तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी के अध्यक्ष शिक्षा सचिव बनाए गए हैं. इसके अलावा प्राथमिक शिक्षा निदेशक, कोशी प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, बिहार शिक्षा परियोजना के अधिकारी और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को सदस्य बनाया गया है.

सरकार ने साफ कर दिया है कि नई नीति लागू होने तक शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा. इसका मतलब है कि फिलहाल सभी ट्रांसफर प्रक्रियाएं रुकी रहेंगी. प्रस्तावित नीति राज्य के सभी राजकीय और राजकीयकृत प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों पर लागू होगी.

सरकार का मानना है कि इस नई नीति से जहां शिक्षकों का सही वितरण होगा, वहीं छात्रों को बेहतर शिक्षा का लाभ मिल सकेगा. अब सभी की नजर इस पर टिकी है कि कमेटी कैसी नीति तैयार करती है और इसे कब तक लागू किया जाता है.