पटना का फेफड़ा कहे जाने वाला संजय गांधी जैविक उद्यान अब पूरी तरह हाईटेक और स्मार्ट अनुभव के साथ नए अंदाज़ में नजर आ रहा है। बुधवार से यहां ‘गाइडेड टूर’ की शुरुआत हुई है, जिसने पहले ही दिन करीब 700 पर्यटकों को आकर्षित कर लिया। यह बदलाव सिर्फ दिखावे का नहीं, बल्कि जू को एक शैक्षणिक और इंटरएक्टिव स्पेस में बदलने की दिशा में बड़ा कदम है।
अब यहां जू घूमना सिर्फ टाइमपास या मनोरंजन नहीं रहा, बल्कि एक डिजिटल लर्निंग एक्सपीरियंस बन गया है। पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों के लिए जू प्रशासन ने तकनीक का शानदार उपयोग किया है, जिससे लोग प्रकृति और जीव-जंतुओं को और करीब से समझ सकेंगे।
जू भ्रमण को आसान और आरामदायक बनाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों यानी ई-वाहनों की सुविधा दी गई है। इनके साथ प्रशिक्षित गाइड्स भी मौजूद रहेंगे, जो न केवल आपको पूरे जू की सैर कराएंगे, बल्कि हर जानवर और दुर्लभ पेड़-पौधों के बारे में दिलचस्प जानकारी भी देंगे।
सबसे खास बात यह है कि अब जू परिसर के पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। जैसे ही आप अपने मोबाइल से इन्हें स्कैन करेंगे, उस पेड़ की प्रजाति, उम्र और औषधीय गुणों की पूरी जानकारी तुरंत आपके सामने आ जाएगी।
लंबी कतारों से छुटकारा दिलाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग को भी बेहद आसान बना दिया गया है। जू के मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए घर बैठे टिकट बुक किया जा सकता है। टिकट की कीमत भी किफायती रखी गई है—बड़ों के लिए ₹50 और बच्चों के लिए ₹20।
इसके अलावा ऐप में एक खास नेविगेशन फीचर भी जोड़ा गया है, जो आपको नक्शे की तरह रास्ता दिखाएगा कि आपका पसंदीदा जानवर जू के किस हिस्से में है। अगर आपका कोई सामान खो जाता है, तो ‘खोया-पाया’ फीचर आपकी मदद करेगा।
पूरे जू में हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा भी दी गई है। जैसे ही आप किसी जानवर के पास पहुंचेंगे, आपके फोन पर उससे जुड़ी जानकारी ऑडियो और टेक्स्ट दोनों रूप में मिल जाएगी।
अब पटना जू सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि एक डिजिटल म्यूजियम बन चुका है, जहां मनोरंजन के साथ ज्ञान भी मिलेगा।