पटना समेत राज्य के सात शहरों की हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है। पटना, ना हाजीपुर, बिहारशरीफ, बक्सर, राजगीर न और समस्तीपुर वायु प्रदूषण के मामले में ऑरेंज जोन में हैं। इन शहरों का औसत एक्यूआई लेवल 200-300 के बीच. रिकॉर्ड किया गया है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानक के मुताबिक, जहां का एक्यूआई लेवल 200-300 के बीच है, वहां के लोग खराब हवा में सांस ले रहे हैं।
पटना का औसत एक्यूआई लेवल शुक्रवार को 217 रहा, लेकिन कई इलाकों की स्थिति खतरनाक स्तर तक पहुंच गई। वेटनरी मैदान इलाके का एक्यूआई लेवल 343, सचिवालय इलाके का 253, दानापुर का 202, तारांमंडल का 254, गांधी मैदान का 163 रहा। पटना सिटी की स्थिति बेहतर रही, जहां का एक्यूआई लेवल महज 90 दर्ज किया गया। राजधानी के वातावरण में धूल-कण में वृद्धि हुई है। इस वजह से पीएम 2.5 और पीएम 10 मानक से तीन गुना से अधिक दर्ज किया गया है।
पटना में वायु प्रदूषण बढ़ने की सबसे बड़ी वजह धूलकण है। धूलकण न उड़े, इसके लिए नगर निगम की एंटी स्मॉग जेट मशीन से सड़कों पर पानी का छिड़काव करना है। लेकिन, एक्यूआई लेवल मापने वाली मशीन और उनके आसपास पानी का छिड़काव ज्यादा किया जा रहा है। पटना में छह जगह यह मशीन लगी है। एक बार में 15-20 मिनट तक एक मशीन को नहलाया जाता है। इंदौर में पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं जलवायु परिवर्तन पर काम कर रही एवियंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के एमडी पंकज कुमार ने कहा-मॉनिटरिंग मशीन के पास पानी का छिड़काव होगा तो उसके सेंसर तक वास्तविक धूलकण और हवा के साथ उड़ने वाली अन्य सामग्री और गैस की जानकारी नहीं पहुंचेगी। 10 मीटर के आसपास की हवा को सेंसर पकड़ पाता है। जब उसके आसपास पानी का छिड़काव कर दिया जाएगा तो इससे एक्यूआई लेवल स्वतः कम हो जाएगा। उधर, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन डॉ. डीके शुक्ला ने कहा कि एक्यूआई लेवल मापने वाली मशीन के पास पानी का छिड़काव करने से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।