पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़े मामले में मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद कई नए तथ्य उजागर हुए हैं। इन तथ्यों के आधार पर यह मामला अब केवल एक सामान्य मृत्यु की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों ने हॉस्टल प्रबंधन की व्यवस्था, पुलिस प्रशासन की शुरुआती जांच और प्रारंभिक मेडिकल आकलन — तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।
परिजनों की आशंका और शुरुआती प्रतिक्रिया
मृतका के परिजनों ने घटना के बाद से ही परिस्थितियों को संदिग्ध बताया था और विस्तृत जांच की मांग की थी। परिजनों की ओर से आशंका जताई गई थी कि यह मामला केवल दवा सेवन या प्राकृतिक कारणों से जुड़ा नहीं हो सकता।
हालांकि शुरुआती स्तर पर पुलिस और अस्पताल की ओर से दिए गए बयानों में इन आशंकाओं को प्राथमिक जांच के आधार पर खारिज किया गया था। अब मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद उन शुरुआती निष्कर्षों की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट पर उठे प्रश्न
प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कहा गया था कि प्रथम दृष्टया मौत नींद की दवा के सेवन से हुई प्रतीत होती है और शरीर पर किसी तरह की गंभीर बाहरी चोट के स्पष्ट संकेत नहीं पाए गए थे।
लेकिन मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों और आंतरिक निष्कर्षों ने इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब यह स्पष्ट है कि प्रारंभिक मेडिकल आकलन और पोस्टमार्टम निष्कर्षों के बीच अंतर है, जिसकी जांच आवश्यक है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार छात्रा की गर्दन के दाहिने हिस्से, साइड और पीछे की ओर नाखूनों के खरोंच और घर्षण के निशान पाए गए हैं। गर्दन पर सूखी खून जमी पपड़ी भी दर्ज की गई है। चोटों का आकार लगभग 0.5 सेंटीमीटर से 1.25 सेंटीमीटर तक बताया गया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि दाहिनी जुगुलर नस के क्षेत्र में पंक्चर जैसी चोट पाई गई है, जिसकी सामान्य परिस्थितियों में संभावना कम मानी जाती है।
शरीर पर अन्य चोटों के संकेत
पोस्टमार्टम के दौरान शरीर के अन्य हिस्सों — कंधे, क्लेविकुलर क्षेत्र, हाथ, जांघ, घुटने, भुजा, छाती और पीठ — पर नील, खरोंच, सूजन और घाव दर्ज किए गए हैं। मेडिकल बोर्ड के अनुसार कुछ चोटें हालिया प्रतीत होती हैं, जबकि कुछ पुरानी भी हो सकती हैं।
आंतरिक जांच में गर्दन के आसपास के ऊतकों में रक्तस्राव और दाहिनी जुगुलर शीथ में चोट के संकेत दर्ज किए गए हैं।
जननांग संबंधी निष्कर्ष
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में जननांग क्षेत्र से जुड़े निष्कर्ष भी दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में चोट के संकेत पाए गए हैं और योनि क्षेत्र में हालिया परिवर्तन तथा रक्तस्राव का उल्लेख किया गया है।
मेडिकल बोर्ड ने अपनी राय में यह स्पष्ट किया है कि इन निष्कर्षों के आधार पर आगे की फॉरेंसिक जांच आवश्यक है। योनि स्लाइड को सुरक्षित रखकर फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी भेजा गया है और मृत्यु का अंतिम कारण एफएसएल व हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट आने तक सुरक्षित रखा गया है।
जांच के दायरे में कई पहलू
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद अब जांच का दायरा व्यापक हो गया है। हॉस्टल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था, पुलिस की शुरुआती जांच प्रक्रिया और प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट — सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा की आवश्यकता बताई जा रही है।
यह मामला अब केवल एक छात्रा की मृत्यु का नहीं, बल्कि जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ गया है। आगे की कार्रवाई पर नजर प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ की जाए। अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे।