मुकेश सहनी को यूपी प्रशासन ने थमाया नोटिस, घर में किया गया नजरबंद

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Sujeet Kumar
Updated at : Jun 29, 2026, 6:37:00 PM

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उन्हें 30 जून को दोपहर 12 बजे तक लखनऊ स्थित आवास पर रोकने के आदेश को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। पार्टी द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार मुकेश सहनी को यूपी प्रशासन ने नोटिस थमा दिया है और उनको घर में नजरबंद कर दिया गया है।

पार्टी द्वारा जारी किए गए एक बयान में मुकेश सहनी ने कहा कि उन्हें थाना सुशांत गोल्फ सिटी, कमिश्नरेट लखनऊ की ओर से एक नोटिस दिया गया है, जिसमें शाहजहाँपुर जाने पर राजनीतिक एवं सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका जताते हुए घर से बाहर नहीं निकलने का निर्देश दिया गया है। मुकेश सहनी ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। लोकतंत्र में किसी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक दल के नेता को जनता से मिलने, पीड़ित परिवारों का दुख-दर्द साझा करने और अपनी बात रखने से रोकना संविधान प्रदत्त अधिकारों का खुला उल्लंघन है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर उसे विपक्ष की आवाज और जनता के बीच संवाद से इतना डर क्यों लग रहा है। सहनी ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उन्हें लखनऊ स्थित आवास पर नजरबंद किए जाने को लोकतंत्र पर सीधा हमला और सरकार की तानाशाही मानसिकता का प्रमाण बताया है।

सहनी ने कहा कि जब सरकार जनता के सवालों का जवाब देने में असफल हो जाती है, तब वह प्रशासन का सहारा लेकर विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास करती है। वे शाहजहांपुर में लोगों से मिलने और उनकी समस्याएं सुनने जा रहे थे, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने नोटिस थमाकर उन्हें घर में कैद कर दिया। यह कार्रवाई बताती है कि सरकार को जनता से नहीं, बल्कि जनता के बीच जाने वाले विपक्षी नेताओं से डर लगने लगा है। यदि किसी सरकार को एक राजनीतिक दल के नेता के किसी जिले में जाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर है, तो यह उस सरकार की सबसे बड़ी विफलता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि विपक्ष के नेताओं को घरों में बंद कर देना। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि भय और दमन की राजनीति है। वीआईपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। मुकेश सहनी ने कहा कि उन्हें चाहे जितनी बार रोका जाए, नजरबंद किया जाए या प्रशासनिक दबाव बनाया जाए, वे सामाजिक न्याय, संविधान और वंचित समाज की आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे। निषाद, बिंद, केवट, मछुआरा और समाज के सभी कमजोर वर्गों के अधिकारों की लड़ाई पहले भी लड़ते रहे हैं और आगे भी पूरी मजबूती से लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत है। सरकारें पुलिस के सहारे कुछ समय के लिए नेताओं को रोक सकती हैं, लेकिन जनता की आवाज को कभी कैद नहीं कर सकती। वीआईपी पार्टी इस कार्रवाई का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी और देशभर के लोकतंत्र प्रेमियों से इस तानाशाही सोच के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करती है।