पटना का दिल कहे जाने वाले गांधी मैदान को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अगर आप भी यहाँ दौड़ने या टहलने जाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि गांधी मैदान में फिजिकल ट्रेनिंग सेंटरों के संचालन पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी।
आखिर गांधी मैदान से इन सेंटरों को क्यों हटाया गया? जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम के मुताबिक, पिछले कुछ समय में यहाँ ट्रेनिंग संस्थानों की संख्या बेतहाशा बढ़ गई थी।
आंकड़ों का खेल: पहले जहाँ सिर्फ 14 संस्थान सक्रिय थे, वहीं हाल के दिनों में यह संख्या बढ़कर 60 तक पहुँच गई थी।
अत्यधिक भीड़: हजारों अभ्यर्थियों के एक साथ जुटने से मैदान में पैर रखने की जगह नहीं बचती थी।
मैदान की बदहाली: लगातार भारी गतिविधियों के कारण घास खत्म हो रही थी, जगह-जगह गड्ढे हो गए थे और पूरे मैदान में धूल उड़ने लगी थी।
इस फैसले का मतलब यह कतई नहीं है कि आम लोगों के लिए मैदान बंद है। प्रशासन ने साफ किया है कि:
आम पर्यटकों और सुबह-शाम की सैर करने वालों पर कोई रोक नहीं है।
व्यक्तिगत रूप से दौड़ने या व्यायाम करने वालों के लिए मैदान पूरी तरह खुला है।
यह कदम केवल व्यावसायिक ट्रेनिंग सेंटरों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है ताकि गांधी मैदान की हरियाली और सुंदरता को बचाया जा सके।
अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था भी की है। अब सभी ट्रेनिंग सेंटर दीघा घाट और कलेक्टोरेट घाट पर शिफ्ट कर दिए गए हैं। अभ्यर्थियों को अब वहीं प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशासन का लक्ष्य गांधी मैदान को फिर से हरा-भरा बनाना है। इसके लिए पौधारोपण और रखरखाव के सख्त निर्देश दिए गए हैं। जनता की सुविधा और पर्यावरण के संतुलन के लिए यह फैसला जनहित में लिया गया है।
डीएम ने कहा कि गांधी मैदान में मॉर्निंग वॉक, इवनिंग वाक, व्यक्तिगत अथवा निजी तौर पर दौड़ने, टहलने आदि पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। गांधी मैदान आम जनता की सुविधा के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल है। इसके सौन्दर्याकरण एवं विकास के लिए जिला प्रशासन की ओर से नियमित तौर पर जरूरी कदम उठाया जाता है। गांधी मैदान में पेड़-पौधे लगाने, हरियाली बढ़ाने आदि बढ़ाने और बेहतर रखरखाव के लिए संबंधित विभागों को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं।