फर्जी वेबसाइट और नकली इंटरव्यू का जाल, पटना मेट्रो के नाम पर करोड़ों की ठगी का खुलासा, 3 गिरफ्तार

पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में गिरोह के सरगना समेत तीन शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Jan 01, 2026, 9:58:00 AM

पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में गिरोह के सरगना समेत तीन शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में करीब आठ से दस लाख रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है, हालांकि पुलिस का मानना है कि ठगी की रकम करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।

पुलिस के अनुसार यह गिरोह पिछले दो वर्षों से बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सुपौल निवासी अखिलेश कुमार चौधरी, नवादा के दिनेश कुमार साव और मधेपुरा के नवनीत कुमार के रूप में हुई है। इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अखिलेश कुमार चौधरी बताया जा रहा है।

एएसपी सदर अभिनव कुमार ने बताया कि एक अभ्यर्थी की शिकायत के बाद पुलिस ने छापेमारी की, जहां दो आरोपी इंटरव्यू लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए। पूछताछ में पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।

जांच में सामने आया है कि 2000 से अधिक बेरोजगार युवाओं से आवेदन लिए गए थे, जिनमें से करीब 700 अभ्यर्थियों को चयनित दिखाया गया। विश्वास दिलाने के लिए उम्मीदवारों को पटना बुलाकर इंटरव्यू कराया जाता था। इतना ही नहीं, जुलाई महीने में पटना के उर्मिला इंटरप्राइजेज नामक एक परीक्षा केंद्र पर लिखित परीक्षा भी कराई गई थी।

इंटरव्यू के दौरान जानबूझकर कठिन सवाल पूछे जाते थे। करीब 700 में से लगभग 80 उम्मीदवारों को यह कहकर फेल कर दिया जाता था कि उनकी नौकरी पक्की नहीं है। इसके बाद उन्हें डेटा ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन या फिटर की ट्रेनिंग का झांसा दिया जाता था। ट्रेनिंग के नाम पर 55 हजार रुपये तक की वसूली की गई, लेकिन जब अभ्यर्थी बताए गए ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे तो वहां कुछ भी मौजूद नहीं था।

पुलिस ने बताया कि गिरोह ने फर्जी वेबसाइट चलाने के लिए ओडिशा की एक कंपनी की मदद ली थी। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और अन्य पीड़ितों से भी सामने आने की अपील की गई है।