बिहार में तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों का शैक्षणिक मूल्यांकन, ‘परख’ के तहत डिजिटल मिडलाइन सर्वे शुरू

बिहार में तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों का शैक्षणिक मूल्यांकन, ‘परख’ के तहत डिजिटल मिडलाइन सर्वे शुरू

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Apr 09, 2026, 5:35:00 PM

बिहार में प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को परखने के लिए कक्षा 3 के विद्यार्थियों पर केंद्रित एक अहम मूल्यांकन अभियान चलाया जा रहा है। ‘परख (PARAKH)’ पहल के अंतर्गत 9 और 10 अप्रैल को आयोजित इस मिडलाइन उपलब्धि सर्वेक्षण का उद्देश्य बच्चों की भाषा और गणितीय समझ का वास्तविक आकलन करना है। यह पहल एनसीईआरटी के निर्देशन में संचालित हो रही है, जिसमें राज्य के सभी 38 जिलों के 489 चयनित विद्यालयों को शामिल किया गया है। सर्वे में कुल 5868 छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं।

इस आकलन प्रक्रिया में हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू माध्यम के विद्यार्थियों की दक्षता को जांचा जा रहा है। प्रत्येक विद्यालय से 12 बच्चों का चयन यादृच्छिक पद्धति (रैंडम सैंपलिंग) के आधार पर किया गया है, ताकि प्राप्त आंकड़े निष्पक्ष और प्रतिनिधिक हों। इसका लक्ष्य यह समझना है कि बच्चों की बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणना करने की क्षमता किस स्तर पर है।

सर्वेक्षण के सफल संचालन के लिए डायट (DIET) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे डीएलएड के विद्यार्थियों को फील्ड इन्वेस्टिगेटर की भूमिका दी गई है। इन प्रशिक्षुओं को 7 और 8 अप्रैल को डायट के मास्टर ट्रेनरों द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे वे डेटा संग्रहण और मूल्यांकन प्रक्रिया को सटीक तरीके से पूरा कर सकें। इससे पहले 6 अप्रैल को एससीईआरटी, पटना में परख से जुड़े मास्टर ट्रेनरों ने डायट के व्याख्याताओं को प्रशिक्षित किया था। इस बहु-स्तरीय प्रशिक्षण प्रणाली से पूरे सर्वे को व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने का प्रयास किया गया है।

विद्यालयों का चयन भी एक तय प्रक्रिया के तहत किया गया है। करीब दो महीने पहले एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार एससीईआरटी, पटना ने स्कूलों का चयन किया, जिसके बाद डायट की सहायता से उनका सत्यापन सुनिश्चित किया गया। इससे सर्वेक्षण की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूती मिली है।

विशेष बात यह है कि इस बार सर्वेक्षण पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है। इसके लिए एक खास मोबाइल एप विकसित किया गया है, जिसे आईआईटी दिल्ली के सहयोग से तैयार किया गया है। फील्ड में कार्यरत सभी अन्वेषकों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे आंकड़ों का संग्रह और विश्लेषण तेजी और सटीकता के साथ हो सके।

गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति 2022 के तहत पहले बेसलाइन सर्वेक्षण किया गया था, जबकि यह मिडलाइन सर्वे उस प्रक्रिया का अगला चरण है, जो शिक्षा के स्तर में हो रहे बदलावों को मापने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।