बिहार सरकार ने राज्य में चल रहे व्यापक भूमि सर्वेक्षण अभियान को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि पारिवारिक विवाद या जमीन के बंटवारे में देरी अब सर्वे प्रक्रिया में बाधा नहीं बनेगी। सरकार ने निर्णय लिया है कि जिन परिवारों में अभी तक जमीन का औपचारिक विभाजन नहीं हुआ है, वहां भी सर्वे कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में भूमि रिकॉर्ड फिलहाल उन्हीं पूर्वजों के नाम पर सुरक्षित रखे जाएंगे, जिनके नाम पुराने अभिलेखों में दर्ज हैं।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्यभर में लंबित पड़े सर्वे कार्यों को तेज करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। विभागीय स्तर पर अतिरिक्त अधिकारियों और कर्मियों की तैनाती की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। सरकार का मानना है कि बिहार में बढ़ते भूमि विवाद कई गंभीर आपराधिक घटनाओं की जड़ बन चुके हैं, इसलिए जमीन के रिकॉर्ड को दुरुस्त और पारदर्शी बनाना आवश्यक है।
सरकारी जमीनों की पहचान में AI तकनीक का सहारा
भूमि प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करने जा रही है। AI की मदद से सरकारी जमीनों की पहचान, रिकॉर्ड सत्यापन और डिजिटल डाटा प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक के इस्तेमाल से फर्जी दस्तावेजों और अवैध कब्जों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
लापरवाह अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलों में सर्वे और परिमार्जन कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से काम में लापरवाही पाई गई, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने वर्ष 2027 के अंत तक पूरे राज्य में भूमि सर्वेक्षण पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।
पुराने खतियान गायब होने से बढ़ी चुनौती
सर्वे अभियान के दौरान सबसे बड़ी समस्या पुराने अभिलेखों की अनुपलब्धता बनकर सामने आई है। जानकारी के अनुसार राज्य के लगभग 45 हजार गांवों में से करीब 8 हजार गांवों के कैडेस्ट्रल खतियान उपलब्ध नहीं हैं। रिकॉर्ड की कमी के कारण कई स्थानों पर सर्वे कार्य प्रभावित हो रहा है।
इसी को देखते हुए सरकार ने लोगों से पुराने दस्तावेज और जमीन संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की अपील की है। साथ ही स्वघोषणा के आधार पर भूमि विवरण भी एकत्र किया जा रहा है। विभाग ने अंचल अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि ‘खास महाल’ से जुड़े मामलों में वे स्वयं निर्णय लेने के बजाय उच्चाधिकारियों को मामला भेजें।
अब पूरी तरह डिजिटल होंगे भू-अभिलेख
भूमि रिकॉर्ड प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ऑफलाइन भू-अभिलेख जारी करने की व्यवस्था समाप्त करने का फैसला लिया है। अब सभी अभिलेख केवल ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का तर्क है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और फर्जीवाड़े की संभावनाएं कम होंगी।
लंबित मामलों के निपटारे के लिए अतिरिक्त ड्यूटी
राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हो गए हैं। इसे देखते हुए विभाग ने कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त कार्य अवधि तय की है। अब कर्मियों को सुबह और देर शाम अतिरिक्त समय तक काम करना होगा, ताकि रुके हुए मामलों का जल्द समाधान किया जा सके। सरकार पूरे भूमि सर्वे अभियान को मिशन मोड में पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।