भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सीएम सम्राट चौधरी ने बड़ी घोषणा की है। भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता मिलेगी। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह फैसला लिया है। सीएम सम्राट चौधरी ने पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया एक्स पर भरत तिवारी के परिवार को लेकर बड़ी घोषणा की है। सीएम सम्राट चौधरी ने ट्वीट करते हुए लिखा है-न्यायिक जांच के अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार द्वारा दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक परिजन को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी।
दरअसल भोजपुर के बिलौटी गांव में पिछले दिनों हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने तत्काल एक जांच दल गठित किया था। न्यायिक जांच कमेटी ने सरकार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है। इस अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बड़ा ऐलान किया है। समिति ने पूरी निष्पक्षता के साथ घटना से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने बिना किसी विलंब के पीड़ित पक्ष के हित में यह त्वरित निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हर स्थिति में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की विधि-सम्मत कार्रवाई भी तेजी से की जाएगी। बीते 24 जुलाई को भरत तिवारी के परिजनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास, एक अणे मार्ग में हुई इस मुलाकात के दौरान भरत तिवारी की मां आशा देवी समेत परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान भरत तिवारी के परिजनों को भरोसा दिलाया कि मामले में न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। अब सरकार ने भरत भूषण तिवारी के परिवार को लेकर बड़ी घोषणा की है।
बता दें कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में तत्कालीन एसडीपीओ, थानेदार समेत कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मामला बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया। आयोग की जिम्मेदारी पटना हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा को सौंपी गई है। फिलहाल आयोग मामले की जांच कर रहा है।