वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में करंट की चपेट में आया बाघ, फसल सुरक्षा के लिए लगाए गए तार से गई जान

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में एक बार फिर जंगली जानवरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Jan 28, 2026, 7:27:00 PM

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में एक बार फिर जंगली जानवरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मंगुराहा वनप्रक्षेत्र के जंगलों से भटक कर निकला एक बाघ मानपुर थाना क्षेत्र के पुरैनिया गांव के पश्चिम सरेह स्थित गेहूं के खेत में मृत अवस्था में पाया गया। खेत में बाघ का शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

ग्रामीणों के अनुसार, सुबह खेत की ओर जाने पर उन्होंने गेहूं के खेत में बाघ को बेसुध पड़ा देखा। पहले तो लोग डर गए, लेकिन जब काफी देर तक बाघ में कोई हलचल नहीं हुई, तब इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस के सहयोग से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि फसल की सुरक्षा के लिए किसान द्वारा खेत के चारों ओर लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से बाघ को करंट लगा, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, वन विभाग या जिला प्रशासन की ओर से अब तक इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि बाघ की मौत को संदिग्ध परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद वन विभाग ने मृत बाघ के शव को कब्जे में लेकर मंगुराहा वनप्रक्षेत्र कार्यालय पहुंचाया। वहां विधि-सम्मत प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद बाघ का अंतिम संस्कार किया जाएगा। वन अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही बाघ की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

गौरतलब है कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में जंगली जानवरों के भटक कर आबादी वाले इलाकों में पहुंचने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में यह घटना वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध बिजली तारों के इस्तेमाल पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा करती है।