बिहार में खेल के विकास के लिए IIT चेन्नई और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के बीच जल्द ही समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जाएगा। मंगलवार को पाटलिपुत्र खेल परिसर में IIT चेन्नई के डॉ बापजी श्रीनिवासन ने तीरंदाजी और शूटिंग के लिए विकसित आई-ट्रैकिंग सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया।
इस बात की जानकारी देते हुए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि प्रोफेसर बापजी श्रीनिवासन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड मैकेनिक्स विभाग में प्रोफेसर तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पोर्ट्स साइंस एंड एनालिटिक्स (CESSA) के सह-प्रमुख हैं। मई महीने में IIT चेन्नई के दौरे के दौरान डॉ. महेश एवं डॉ बापजी श्रीनिवासन से बिहार में खेल और खिलाड़ियों के विकास पर विस्तृत चर्चा के साथ आईआईटी मद्रास के रिसर्च पार्क, विभिन्न विभाग, विभिन्न रिसर्च लैब एवं इंक्यूबेशन सेंटर का दौरा किया गया, जहाँ खेल एवं स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी से जुड़े विभिन्न स्टार्टअप्स के कार्यों को करीब से समझने का अवसर मिला। इसी सिलसिले में आज डॉ बापजी श्रीनिवासन ने अपने सहयोगी के साथ पाटलिपुत्र खेल परिसर में बिहार की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज अंशिका कुमारी के साथ तीरंदाजी और शूटिंग के लिए विकसित आई-ट्रैकिंग सिस्टम का किया सफल प्रदर्शन किया।
इस आई ट्रैकिंग सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए डॉक्टर श्रीनिवासन ने कहा कि हमारी प्रमुख तकनीकों में से एक आई-ट्रैकिंग सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से तीरंदाजों और निशानेबाज़ों के लिए विकसित किया गया है। इस सिस्टम में दो कैमरे खिलाड़ी की आंखों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं, जबकि एक बाहरी कैमरा लक्ष्य पर नज़र रखता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि खिलाड़ी का ध्यान किस प्रकार केंद्रित है। अनुभवी खिलाड़ी की नज़र लक्ष्य पर अधिक स्थिर रहती है, जबकि शुरुआती खिलाड़ियों की दृष्टि अपेक्षाकृत अधिक भटकती है। यह तकनीक खिलाड़ियों के फोकस का वैज्ञानिक विश्लेषण कर उनके प्रदर्शन में सुधार करने में मदद करती है।
उन्होंने बताया कि हमने एक स्मार्ट इनसोल सिस्टम भी विकसित किया है, जिसे खिलाड़ी के जूते के अंदर लगाया जाता है। यह पैरों पर पड़ने वाले दबाव और शरीर के संतुलन को मापता है। तीरंदाजी और शूटिंग जैसे खेलों में यह बताता है कि खिलाड़ी का भार दोनों पैरों पर समान रूप से है या नहीं, वह आगे या पीछे कितना झुक रहा है और उसकी मुद्रा कितनी संतुलित है। यही तकनीक एथलेटिक्स और भारोत्तोलन में भी उपयोगी है, जहाँ यह बल वितरण और मूवमेंट का सटीक विश्लेषण करती है। हमारा उद्देश्य हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और डेटा आधारित विश्लेषण के माध्यम से खिलाड़ियों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। हमने तीरंदाजी, शूटिंग, मुक्केबाज़ी, कुश्ती, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स जैसे खेलों के लिए कई समाधान विकसित किए हैं।
शंकरण ने आगे कहा कि वाले कुछ दिनों में हम खिलाड़ियों के साथ प्रारंभिक परीक्षण करेंगे और उसके बाद दीर्घकालिक परियोजनाओं पर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। हमारा उद्देश्य आधुनिक खेल विज्ञान और तकनीक के माध्यम से बिहार के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाना है। जल्द ही बिहार राज्य खेल प्राधिकरण और IIT चेन्नई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर जमीनी स्तर पर इस दिशा में काम शुरु किया जाएगा।