बिहार के नालंदा में मिड-डे-मील का भोजन खाने से 50 से अधिक बच्चे अचानक बीमार हो गए। भोजन करने के कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टी, दस्त और चक्कर आने की शिकायत होने लगी। कई बच्चे बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में सभी बच्चों को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की सूचना मिलते ही हिलसा SDO अमित कुमार पटेल और शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी अस्पताल पहुंचे हैं।
दरअसल नालंदा जिले के नगरनौसा के मध्य विद्यालय में बुधवार को मिड-डे-मील का भोजन खाने से अचानक 50 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। मिली जानकारी के अनुसार रोज की तरह बुधवार को भी स्कूल के लंच ब्रेक के दौरान बच्चों को गरमागरम छोले और चावल परोसे गए। बच्चे खाना खा रहे थे कि अचानक कुछ बच्चों को जी मिचलाने लगा और पेट में ऐंठन के कारण वे दर्द से कराहने लगे। देखते ही देखते 50 से ज्यादा बच्चों ने उल्टी, दस्त और चक्कर आने की शिकायत की। दर्द से कराहते हुए कई मासूम बच्चे स्कूल के गलियारों और क्लासरूम में ही गिर पड़े और बेहोश हो गए।
आनन-फानन में सभी बच्चों को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से बीमार एक छात्रा को बेहतर इलाज के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही हिलसा SDO अमित कुमार पटेल और शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी अस्पताल पहुंचे हैं। इस घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई और हिलसा SDO समेत शिक्षा विभाग के तमाम आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे।अधिकारियों ने एक-एक बच्चे के पास जाकर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए।
स्कूल की प्रधानाचार्य रजनी कुमारी ने बताया कि बच्चों के खाना शुरू करने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। कई बच्चों को लगातार उल्टियां होने लगीं, जिसके बाद उन सभी को तुरंत नगरनौसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और चांदी रेफरल अस्पताल ले जाया गया। पांचवीं कक्षा की छात्रा अमृता कुमारी ने बताया कि मिड-डे मील में बच्चों को चावल और चने (छोला) की सब्जी परोसी गई थी। उसका आरोप है कि भोजन में किसी दवा जैसी गोली दिखाई दी थी। भोजन करने के बाद कई बच्चों की तबीयत अचानक खराब होने लगी।
वहीं स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। भोजन के नमूने सुरक्षित रखे गए हैं और बच्चों के बीमार होने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। फिलहाल अधिकांश बच्चों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। भोजन की गुणवत्ता की बिना जांच किए ही इसे बच्चों को परोस दिया गया, जिससे इतनी बड़ी संख्या में नौनिहाल बीमार पड़ गए। लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।