मुकेश सहनी का राज्य सरकार पर बडा आरोप, कह दी यह बात

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Sujeet Kumar
Updated at : Jun 25, 2026, 6:09:00 PM

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने मुजफ्फरपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में पप्पू सहनी के कथित फेक एनकाउंटर मामले को लेकर पुलिस-प्रशासन और सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चार महीने पहले पप्पू सहनी की हत्या को पुलिस ने एनकाउंटर का नाम दिया, जबकि यह स्पष्ट रूप से हत्या का मामला है। सहनी ने कहा कि मृतक के खिलाफ पिछले तीन वर्षों में कोई नया आपराधिक मामला नहीं था और पुराने मामलों में भी वह जमानत पर था। ऐसे में पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर की कहानी पर कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण पप्पू सहनी की मौत हुई, लेकिन अब तक दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने बताया कि 11 मार्च को अमर शहीद जुब्बा सहनी के शहादत दिवस पर वीआईपी नेताओं ने एसपी से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। उस समय दो महीने में रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो जांच समिति की स्थिति स्पष्ट की गई और न ही किसी जिम्मेदार पुलिसकर्मी पर कार्रवाई हुई। पप्पू सहनी को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उनकी आत्मा को न्याय जरूर दिया जा सकता है। उन्होंने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, आश्रितों को सरकारी नौकरी और दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय कर कड़ी सजा देने की मांग की।

सहनी ने आरा के भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां समाज के दबाव और व्यापक जनआक्रोश के बाद रिटायर्ड जज से जांच कराई जा रही है और पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या बिहार में गोली भी जाति देखकर मारी जाएगी और न्याय भी जाति देखकर मिलेगा?  अगर पप्पू सहनी हत्याकांड में समय रहते कार्रवाई हुई होती तो बाद की ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद समाज के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और अन्य दलों के कई नेता चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि समाज के साथ अन्याय पर खुलकर बोलना ही असली नेतृत्व है।

पूर्व मंत्री ने कहा कि पुलिस को किसी भी व्यक्ति को सीधे गोली मारने का अधिकार नहीं है। अपराधी है तो उसे कानून के तहत सजा दिलाई जाए, लेकिन एनकाउंटर के नाम पर हत्या किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं हो सकता। बिहार में उत्तर प्रदेश जैसा मॉडल नहीं चलेगा, बल्कि ऐसा बिहार मॉडल चाहिए, जहां सभी जाति और धर्म के लोग सम्मान के साथ जी सकें। सहनी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पप्पू सहनी हत्याकांड में एक महीने के भीतर न्याय नहीं मिला तो वीआईपी पार्टी सड़क पर उतरकर आंदोलन, चक्का जाम और लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक विरोध करेगी। उन्होंने सरकार से प्रशासन पर अंकुश लगाने और फेक एनकाउंटर की घटनाओं पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने की मांग की।