'सरकार हमें वेतन दे, नहीं तो कफन में दफन कर दें' वित्त रहित शिक्षकों का धरना, उग्र आंदोलन की चेतावनी

मोतिहारी के कचहरी चौक पर गुरुवार को वित्त रहित शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की और 24 अगस्त तक वेतन भुगतान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।

मोतिहारी के कचहरी चौक पर गुरुवार को वित्त रहित शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की और 24 अगस्त तक वेतन भुगतान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि या तो सरकार हमें वेतन दे, नहीं तो कफन में दफन कर दें,” जो उनकी पीड़ा और आक्रोश को दर्शाता है। 

धरने में बड़ी संख्या में वित्त रहित शिक्षक शामिल हुए, जिन्हें कांग्रेस सेवा दल का भी समर्थन मिला। कांग्रेस सेवा दल द्वारा 20 जून से पूरे बिहार में चरणबद्ध तरीके से एक दिवसीय धरना आयोजित किया जा रहा है, जिसके तहत मोतिहारी में भी यह प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राज्य सरकार ने चुनाव से पहले वित्त रहित शिक्षकों को नियमित करने और वेतन देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों को भुला दिया गया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष गप्पू राय ने मौके पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार लगातार जनता को धोखा दे रही है और सबसे अधिक उपेक्षा वित्त रहित शिक्षकों के साथ हो रही है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चुनाव से पहले शिक्षकों को नियमित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। धरने में शामिल शिक्षकों ने बताया कि राज्य के लगभग हर प्रखंड में कम से कम एक वित्त रहित विद्यालय है, जहां शिक्षक बिना वेतन के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। आर्थिक तंगी के कारण उनके परिवारों की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। कई शिक्षक अपने दैनिक खर्च तक पूरा करने में असमर्थ हैं, बावजूद इसके वे शिक्षा व्यवस्था को संभाले हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए और नियमित वेतन की व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 अगस्त तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे राज्यव्यापी उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

मोतिहारी से सोहराब आलम की रिपोर्ट