फ्रैक्चर को स्थिर रखने के लिए जुगाड! पैर में लगा दिया कार्टन, अब उठे सवाल

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Sujeet Kumar
Updated at : Jun 25, 2026, 8:48:00 PM

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार भले ही बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन पूर्वी चंपारण के सुगौली से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में फ्रैक्चर के इलाज के लिए जरूरी स्प्लिंट या ऑर्थोपेडिक सामग्री उपलब्ध नहीं थी, जिसके बाद डॉक्टरों को कार्टून के सहारे मरीज का टूटा पैर बांधना पड़ा। हालांकि मामला सामने आने के बाद डॉक्टर का बयान भी सामने आया है।

दरअसल पूरी घटना जिले के सुगौली थाना क्षेत्र की है, जहां कुछ ही दिन पहले एक ऑटो और पिकअप वाहन की सीधी टक्कर हो गयी थी। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सभी घायलों को इलाज के लिए सुगौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। इन घायलों में दो लोगों के पैर की हड्डी टूटने की बात सामने आई। अब इसी मामले में आरोप है कि अस्पताल में फ्रैक्चर को स्थिर रखने के लिए जरूरी सामग्री नहीं मिली, जिसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल राहत देने के लिए बेकार पड़े कार्टून का इस्तेमाल कर पैर को बांधा। 

डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की स्थिति को देखते हुए हड्डी को स्थिर रखना जरूरी था, इसलिए प्राथमिक उपचार के तौर पर यह अस्थायी व्यवस्था की गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर सरकारी अस्पतालों में प्राथमिक इलाज के लिए जरूरी उपकरण भी उपलब्ध नहीं होंगे, तो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा कैसे मिलेगी? क्या सरकारी अस्पतालों में इलाज अब भी जुगाड़ के भरोसे चलता रहेगा?