गोपालगंज : गोपालगंज के पूर्व सांसद और बिहार सरकार में मंत्री रहे नगीना राय की हत्या के करीब 35 साल बाद अब मुकदमे में फैसले की घड़ी करीब आ गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम संजीव कुमार सिंह की अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस पूरी हो चुकी है। अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 20 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
बचाव पक्ष का दावा है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में आरोपित फंसाए गए
बचाव पक्ष का दावा है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में आरोपित फंसाए गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल कुमार दुबे ने अदालत में 211 पन्नों के साक्ष्य और कानूनी फैसले प्रस्तुत करते हुए आरोपितों को निर्दोष बताया। उन्होंने दलील दी कि नगीना राय एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व थे और उनकी कई लोगों से दुश्मनी थी। पटना में उन पर पहले भी बम से हमला हुआ था, जिसमें वे बच गए थे।
पूर्व विधायक बच्चा चौबे और उनके परिजनों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण इस मामले में फंसाया गया
बचाव पक्ष के अनुसार, पूर्व विधायक बच्चा चौबे और उनके परिजनों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण इस मामले में फंसाया गया। अधिवक्ता ने घटना के समय को लेकर कथित विसंगतियों, गवाहों के बयानों में अंतर और गोली चलाने वाले हथियार की पहचान को लेकर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि घटना के समय एक आरोपित पटना में और दूसरा अपने ससुराल में था। इन दलीलों के आधार पर उसने आरोपितों को बरी करने की मांग की।
अभियोजन ने अपना पक्ष रखते हुए गवाह और बरामदगी को अहम बताया
अभियोजन ने अपना पक्ष रखते हुए गवाह और बरामदगी को अहम बताया। अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी धर्मदेव सिंह और अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने दलील दी कि नगीना राय की हत्या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण की गई थी। अभियोजन ने आरोपितों के बयानों में कथित विरोधाभासों की ओर अदालत का ध्यान दिलाया। साथ ही, हथियार से गोली चलने, आरोपितों के घर से हथियार बरामद होने और चश्मदीद गवाह की गवाही का हवाला दिया। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और साक्ष्य अदालत के सामने रखे हैं। अब इनकी विश्वसनीयता और कानूनी महत्त्व का आकलन अदालत करेगी।
गोपालपुर गांव निवासी नगीना राय 10 अप्रैल 1991 की शाम करीब छह बजे पटना से गोपालगंज पहुंचे थे
कुचायकोट थाना कांड संख्या 40/1991 के अनुसार, गोपालपुर गांव निवासी नगीना राय 10 अप्रैल 1991 की शाम करीब छह बजे पटना से गोपालगंज पहुंचे थे। को-ऑपरेटिव बैंक में कुछ लोगों से मिलने के बाद वे जीप से घर जा रहे थे। इसी दौरान कुचायकोट थाना क्षेत्र के भोपतपुर गांव में गन्ना लदी बैलगाड़ी के कारण सड़क पर जाम लग गया और उनकी जीप रुक गई। आरोप है कि तभी सात-आठ लोगों ने उन पर गोली चला दी। दो गोलियां लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें सदर अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
अब 20 नवंबर पर सबकी निगाहें टिकी है
वहीं अब 20 नवंबर पर सबकी निगाहें टिकी है। तीन दशक से अधिक समय से चर्चा में रहे इस हत्याकांड में अब अदालत का फैसला आने वाला है। बचाव पक्ष ने आरोपितों को झूठे मुकदमे में फंसाए जाने की दलील दी है, जबकि अभियोजन ने गवाही और बरामदगी को अपने पक्ष का आधार बनाया है। क्या अदालत अभियोजन के साक्ष्यों को दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त मानेगी, या बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार करेगी? इसका जवाब 20 नवंबर को आने वाले फैसले से मिलेगा। तब तक आरोपितों के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।