भदश्री जंगल को जैव विविधता विरासत स्थल बनाने की तैयारी तेज, बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद की टीम ने किया सर्वेक्षण

गोपालगंज जिले के भोरे वन परिसर स्थित भदश्री जंगल को जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में चयनित करने की दिशा में पहल तेज हो गई है।

भोरे (गोपालगंज) : गोपालगंज जिले के भोरे वन परिसर स्थित भदश्री जंगल को जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में चयनित करने की दिशा में पहल तेज हो गई है। जिले की इस प्राकृतिक धरोहर को विशेष पहचान दिलाने और यहां मौजूद जैव विविधता को संरक्षित करने के उद्देश्य से बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद की चार सदस्यीय टीम ने भदश्री जंगल का दौरा कर सर्वेक्षण किया। इस दौरान टीम ने जंगल के प्राकृतिक स्वरूप, पेड़-पौधों, विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और वन संपदा का बारीकी से जायजा लिया। साथ ही जंगल के संरक्षण और इसे जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में चयनित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ बैठक भी आयोजित की गई।

सर्वेक्षण गोपालगंज वन प्रमंडल के हथुआ वन प्रक्षेत्र अंतर्गत भोरे वन परिसर में किया गया

यह सर्वेक्षण गोपालगंज वन प्रमंडल के हथुआ वन प्रक्षेत्र अंतर्गत भोरे वन परिसर में किया गया। बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद की टीम का मुख्य उद्देश्य भदश्री जंगल में उपलब्ध जैव विविधता की पहचान करना, इसकी प्राकृतिक विशेषताओं का आकलन करना तथा इसे जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में चयनित करने की संभावनाओं का अध्ययन करना है। सर्वेक्षण के माध्यम से जंगल की उन विशेषताओं को चिह्नित करने का प्रयास किया गया, जो इसे प्राकृतिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाती हैं।

4 सदस्यीय टीम ने किया जंगल का निरीक्षण

बिहार राज्य जैव विविधता पर्षद की चार सदस्यीय टीम में विषय विशेषज्ञ अमरेश बिहारी झा, यंग प्रोफेशनल हर्षिता प्रकाश तथा इंटर्न दिवाकर कुमार और सुनंदा कुमारी शामिल थीं। टीम के सदस्यों ने जंगल के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण कर वहां मौजूद पेड़-पौधों और वनस्पतियों की जानकारी जुटाई। इसके साथ ही जंगल के पुराने वृक्षों, प्राकृतिक वातावरण और वन संपदा से जुड़े पहलुओं का भी अध्ययन किया।

टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर भदश्री जंगल के ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक स्वरूप से संबंधित जानकारियां प्राप्त की

टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर भदश्री जंगल के ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक स्वरूप से संबंधित जानकारियां प्राप्त की। स्थानीय स्तर पर जंगल की स्थिति, वन संपदा और इसके संरक्षण से जुड़े विषयों पर भी जानकारी एकत्रित की गई। सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल जंगल की वर्तमान स्थिति का आकलन करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में इसके संरक्षण के लिए आवश्यक पहलुओं को भी समझना है।

जैव विविधता प्रबंधन समिति और ग्रामीणों के साथ हुई बैठक

सर्वेक्षण के क्रम में अहियापुर पंचायत की जैव विविधता प्रबंधन समिति एवं स्थानीय निकायों से अनुशंसा प्राप्त करने को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में अहियापुर पंचायत के मुखिया रामजी चौरसिया, वन परिसर पदाधिकारी पूजा कुमारी, वनरक्षी जुबैद अंसारी, अजीत श्रीवास्तव और राजू, मनोज कुमार मिश्रा सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

चयनित करने की प्रक्रिया और इसके संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई

बैठक के दौरान भदश्री जंगल को जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में चयनित करने की प्रक्रिया और इसके संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से जंगल की प्राकृतिक विशेषताओं, पुराने वृक्षों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वन संपदा के बारे में जानकारी ली गई। लोगों ने भी इस पहल को लेकर अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए।

प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ेगी नई पहचान

भदश्री जंगल को जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में चयनित करने की पहल को भोरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि चयन की प्रक्रिया सफल होती है तो इस जंगल को पर्यावरणीय और प्राकृतिक विरासत के रूप में विशेष पहचान मिल सकती है। इससे जंगल में मौजूद जैव विविधता, पुराने वृक्षों और प्राकृतिक वन संपदा के संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

जैव विविधता का संरक्षण केवल वन विभाग या सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है - विशेषज्ञ

विशेषज्ञों के अनुसार, जैव विविधता का संरक्षण केवल वन विभाग या सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अहियापुर पंचायत की जैव विविधता प्रबंधन समिति और ग्रामीणों की सहभागिता इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

भोरे (गोपालगंज) से कुमार मंजेश की रिपोर्ट