मीरगंज में 23 साल पुराने हुए खूनी खेल में कोर्ट ने चार आरोपियों को सुनाई कठोर सजा

गोपालगंज: जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के जिगना गोपालपुर पश्चिम टोला में 23 साल पहले खेत से मिट्टी उठाने को लेकर हुए खूनी संघर्ष के मामले में माननीय न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

गोपालगंज: जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के जिगना गोपालपुर पश्चिम टोला में 23 साल पहले खेत से मिट्टी उठाने को लेकर हुए खूनी संघर्ष के मामले में माननीय न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। गोपालगंज अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ADJ की अदालत ने कांड की सुनवाई करते हुए मुख्य अभियुक्त को आजीवन कारावास और दो को तीन साल और एक को एक साल की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि 18 जून 2003 को मीरगंज थाना इलाके क़े जिगना गोपालपुर गांव के पश्चिम टोला में खेत से मिट्टी उठाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। बात इतनी बढ़ गई कि आरोपितों ने फारसा और लाठी-डंडों से हमला कर वादी के पुत्र और भतीजे को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस घटना को लेकर मीरगंज थाने में भादंवि की धारा 307, 326, 324, 325 और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अनुसंधान के बाद पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्यों के साथ माननीय न्यायालय में आरोप-पत्र समर्पित किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान धारा 302 भी जोड़ी गई।

घटना के 23 साल बाद आयान्यायालय का फैसला

इसी मामले में आज माननीय न्यायालय द्वारा मामले के चारों दोषियों के लिए सजा का ऐलान किया गया। जिसमें मुख्य आरोपी सुमित सिंह क़े पुत्र रंजीत सिंह को कोर्ट ने धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया तो वहीं सुमित सिंह क़े दो पुत्र बुटन सिंह और  मनोज सिंह को  तीन वर्ष  जबकि कांड क़े चौथे आरोपी देशराज सिंह क़े पुत्र संजय को कोर्ट ने एक साल की सजा सुनाई है।

पुलिस और अभियोजन की प्रभावी पैरवी

इस मामले में गोपालगंज पुलिस द्वारा किए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन और मजबूत अनुसंधान ने अहम भूमिका निभाई। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक हरेन्द्र प्रसाद सिंह ने प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप अपराधियों को  कोर्ट ने सजा सुनाई। 

गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट