खाकी' पर भारी बदहाली! मंत्री के गढ़ में टपकती छत के नीचे पहरा दे रहे पुलिसकर्मी

बिहार सरकार के मंत्री और स्थानीय विधायक के अपने ही क्षेत्र में कानून व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं। मामला भोरे विधानसभा क्षेत्र स्थित भोरे पुलिस स्टेशन का है, जो आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

गोपालगंज। एक तरफ जहां राज्य सरकार पुलिस महकमे को हाईटेक करने और आधुनिक बुनियादी ढांचा मुहैया कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ बिहार सरकार के मंत्री और स्थानीय विधायक के अपने ही क्षेत्र में कानून व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने को मजबूर हैं। मामला भोरे विधानसभा क्षेत्र स्थित भोरे पुलिस स्टेशन का है, जो आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

मंत्री के क्षेत्र में ही व्यवस्था लाचार

गौरतलब है कि भोरे विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग क़े मंत्री सुनील कुमार करते हैं। सुनील कुमार न सिर्फ वर्तमान में कैबिनेट मंत्री हैं, बल्कि वे पूर्व में बिहार पुलिस मुख्यालय के भवन निर्माण निगम के महानिदेशक (DG) भी रह चुके हैं। इसके बावजूद, उनके अपने ही गृह क्षेत्र और विधानसभा का थाना भवन दुर्दशा का शिकार है। पद पर रहते हुए भी इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण थाने की सुध न लिया जाना प्रशासनिक और राजनीतिक उपेक्षा को उजागर करता है।

46 साल पुराना भवन, टपकती छत और बर्बाद होते रिकॉर्ड..

भोरे थाने के पुराने भवन का निर्माण आज से लगभग 46 वर्ष पूर्व हुआ था। समय के साथ देख-रेख के अभाव में यह भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बारिश के दिनों में छत से पानी का रिसाव होता है, जिससे थाने में रखे वर्षों पुराने केस डायरी और महत्वपूर्ण दस्तावेज भींगे और बर्बाद हो रहे हैं। पुलिसकर्मी हर समय दुर्घटना की आशंका के बीच काम करने को विवश हैं।

हर साल डेंगू की चपेट में आते हैं पुलिसकर्मी

जर्जर और जलजमाव की स्थिति वाले इस परिसर में पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। थाने में जलजमाव और गंदगी के कारण मच्छर पनपते हैं, जिसकी वजह से हर साल दर्जनों पुलिसकर्मी डेंगू जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। इलाज और ड्यूटी के बीच जूझते जवानों के लिए यह भवन किसी सजा से कम नहीं है।

अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी स्थिति जस की तस

ऐसा नहीं है कि इस बदहाली की जानकारी आला अधिकारियों को नहीं है। पुलिस महकमे के कई वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर थाने का निरीक्षण कर चुके हैं। कागजों पर निर्देश तो दिए गए, लेकिन धरातल पर कोई सुधार नहीं दिखा। शासन-प्रशासन की इस गहरी नींद का खामियाजा यहां तैनात जवानों और अपनी फरियाद लेकर आने वाले आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और जवानों की अब एक ही मांग है कि जल्द से जल्द नए थाना भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि पुलिसकर्मी सुरक्षित माहौल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट