राज्य के गोपालगंज जिले से समाज को संदेश देने वाली खबर है। यहां एक परिवार ने बेटी के जन्म होने पर कुछ इस कदर कदम उठाये कि हर तरफ अब उसकी ही चर्चा हो रही है। परिवार द्वारा उठाये गये कदम की लोग दिल खोल कर प्रशंसा कर रहे हैं और इसे पूरे समाज के लिए एक नजीर बता रहे हैं।
दरअसल गोपालगंज जिले में एक परिवार ने यह संदेश दिया कि बेटी समाज के लिए बोझ नहीं, बल्कि घर की खुशियों और लक्ष्मी का प्रतीक है। बुधवार को जिले के मॉडल सदर अस्पताल से आई एक बेहद खूबसूरत और भावुक कर देने वाली तस्वीर ने हर किसी का दिल जीत लिया। मिली जानकारी के अनुसार गोपालगंज के सदर प्रखंड अंतर्गत फतहा गांव निवासी राहुल कुमार और उनकी पत्नी निशा कुमारी के घर पहली संतान के रूप में एक नन्ही परी ने जन्म लिया। जैसे ही अस्पताल परिसर में बेटी के जन्म की खबर मिली, पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। इस खास पल को हमेशा के लिए यादगार बनाने और समाज को एक सकारात्मक संदेश देने के लिए परिजनों ने एक अनोखा तरीका अपनाया।
इस परिवार ने अस्पताल से नवजात बच्ची और उसकी मां को घर ले जाने के लिए किराये वाहन किया और उसे रंग-बिरंगे गुब्बारों और खूबसूरत फूल-मालाओं से किसी दुल्हन की तरह सजा दिया। इतना ही नहीं कार के शीशे पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा पोस्टर लगाया गया—"बेटी हुई है"। जब यह सजी-धजी कार अस्पताल के मुख्य द्वार पर पहुंची, तो वहां मौजूद हर शख्स की निगाहें उस पर ठहर गईं। नवजात बच्ची का स्वागत इस धूमधाम से किया गया, मानो घर में साक्षात लक्ष्मी का आगमन हुआ हो। इस बेहद भावुक कर देने वाले पल में नवजात की दादी फूलमती देवी ने कहा कि हमारे घर में स्वयं लक्ष्मी आई हैं। बेटी का जन्म हमारे पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व और खुशी की बात है।"
बच्ची के पिता राहुल कुमार और अन्य परिजनों ने खुशी जताने के साथ-साथ मॉडल सदर अस्पताल के डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों का भी आभार व्यक्त किया। राहुल ने कहा कि अस्पताल में मिली बेहतर देखभाल और इलाज से उनका विश्वास सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर और मजबूत हुआ है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे सरकारी अस्पतालों पर भरोसा रखें और बेटियों के जन्म को एक उत्सव के रूप में मनाएं।
अस्पताल परिसर से लेकर घर जाने तक जिसने भी परिवार के इस जश्न को देखा, उसने परिवार की इस सोच की जमकर तारीफ की। यहां तक कि अस्पताल के मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों के बीच में भी यह अनूठी पहल चर्चा का विषय बनी रही। गोपालगंज के इस परिवार का यह कदम साबित करता है कि जब बेटियों का स्वागत उत्सव और सम्मान के साथ होगा, तभी समाज में लैंगिक समानता की सोच वास्तव में मजबूत होगी।