गोपालगंज : कहते हैं प्यार कब, कहां और कैसे हो जाए, किसी को पता नहीं चलता। लेकिन बैकुंठपुर से सामने आई इस प्रेम कहानी को सुनकर शायद आपको भी एक गाना याद आ जाए—“तोहरा ससुरा में बैठायब आटा चक्की की मशीन...”। अब इस गाने की तर्ज पर यह मत समझिए कि यहां आटा चक्की की मशीन लगी थी, कहानी तो बाइक गैरेज की है। लेकिन प्रेमी ने प्रेमिका के घर से महज करीब 200 मीटर की दूरी पर गैरेज की दुकान खोल ली और फिर दुकान के साथ-साथ दिल का कारोबार भी शुरू हो गया।
कहानी की शुरुआत किसी फिल्मी सेट से नहीं, बल्कि सड़क किनारे चलने वाली एक छोटी-सी बाइक गैरेज की दुकान से हुई। हेमूछपरा गांव निवासी हरेंद्र दास का पुत्र रूपेश कुमार एनएच-227ए राम-जानकी पथ और कृतपुरा बाजार के समीप बाइक गैरेज चलाता है। बताया जाता है कि गैरेज से करीब 200 मीटर बंगरा गांव निवासी विसुंदेव दास की पुत्री अमृता कुमारी का घर है। दुकान और घर के बीच की यह दूरी शायद बहुत छोटी थी, लेकिन इसी दूरी के बीच दोनों के बीच पहचान की कहानी शुरू हुई। आने-जाने के दौरान नजरें मिलीं, बातचीत शुरू हुई और फिर धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगे।
पहले जान-पहचान हुई, फिर दोस्ती और देखते ही देखते दोस्ती प्यार में बदल गई। बताया जाता है कि दोनों के बीच काफी समय से बातचीत चल रही थी। मुलाकातों का सिलसिला भी जारी था। ग्रामीणों के अनुसार, युवक कथित तौर पर चोरी-छिपे अपनी प्रेमिका से मिलने उसके घर पहुंचता था। दोनों के बीच क्या बातें होती थीं, यह तो दोनों ही जानते होंगे, लेकिन गांव वालों की नजर से यह प्रेम कहानी ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सकी।
फिर आया मंगलवार की रात का वह वक्त, जिसने पूरी कहानी बदल दी। रात में रूपेश अपनी प्रेमिका अमृता से मिलने पंशाला टोला पहुंचा था। शायद दोनों को लगा होगा कि रात के अंधेरे में मुलाकात आसानी से हो जाएगी। लेकिन इस बार ग्रामीणों की नजर पड़ गई। युवक की मौजूदगी की जानकारी जैसे ही ग्रामीणों को हुई, उसे पकड़ लिया गया। अब तक जो प्यार छुप-छुपकर चल रहा था, वह गांव की चर्चा बन चुका था। मामला परिवार तक पहुंचा। इसके बाद तय हुआ कि सुबह पंचायत बैठाई जाएगी।
बुधवार की सुबह पंचायत में दोनों पक्षों के अभिभावक और गांव के कई लोग जुटे। पंचायत में दोनों के रिश्ते को लेकर बातचीत हुई और युवक-युवती से उनकी इच्छा भी पूछी गई। बताया गया कि दोनों एक-दूसरे के साथ रहने के लिए तैयार हैं। परिवार वालों की सहमति बनने के बाद पंचायत में मौजूद लोगों ने दोनों की शादी कराने का फैसला लिया। और फिर प्रेम कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट आया। जिस प्यार को अब तक छुपाकर रखा जा रहा था, उसी प्यार को लेकर दोनों गांव के पास स्थित काली मंदिर पहुंच गए।
परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में दोनों का विवाह करा दिया गया। यानी मंगलवार की रात तक कहानी थी“चुपके-चुपके मिलने वाला प्यार” बुधवार की सुबह कहानी बन गई“पंचायत में सामने आया प्यार”और कुछ ही देर बाद कहानी का अंत हुआ और काली मंदिर में शादी करा दी गई। अब इस प्रेम कहानी को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई इसे प्यार की जीत बता रहा है तो कोई सवाल उठा रहा है कि क्या किसी युवक-युवती के निजी रिश्ते में पंचायत का फैसला उचित है?
वहीं इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात दोनों की सहमति है। यदि दोनों बालिग हैं और उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह किया है, तो उनकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ किसी भी व्यक्ति पर दबाव डालकर शादी कराना उचित नहीं है। लेकिन इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस प्रेम कहानी की शुरुआत करीब 200 मीटर की दूरी से हुई, उसका सफर सीधे काली मंदिर तक पहुंच गया। एक तरफ गैरेज की दुकान थी, दूसरी तरफ प्रेमिका का घर और बीच में करीब 200 मीटर का रास्ता। इसी रास्ते पर चलते-चलते पहचान हुई, बातचीत हुई, प्यार हुआ और फिर एक रात की मुलाकात ने दोनों को शादी के बंधन में पहुंचा दिया।
अब गांव में लोग इसी प्रेम कहानी की चर्चा कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि प्रेमी ने प्रेमिका के घर के इतने करीब दुकान ही इसलिए खोली थी कि नजरें रोज मिलती रहें, तो कोई इसे महज संयोग मान रहा है। असली कहानी क्या थी, दोनों के दिल में कितना प्यार था और गैरेज खोलने के पीछे असल वजह क्या थी, यह तो रूपेश और अमृता ही बेहतर जानते हैं। फिलहाल इतना जरूर है कि जिस गैरेज से कहानी शुरू हुई, उसी गैरेज के आसपास पनपा प्यार आखिरकार काली मंदिर में शादी तक पहुंच गया।
अनूप नारायण सिंह