किसानों की मुस्कान लौटी: 28 साल बाद फिर चलने को तैयार सकरी चीनी मिल

मधुबनी जिले की सकरी चीनी मिल को दोबारा चालू करने की घोषणा से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. 28 वर्षों से इस मिल के दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहे किसानों और पुराने कर्मचारियों को अब एक नई उम्मीद दिखाई दे रही है.

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
Updated at : Jan 03, 2026, 8:17:00 PM

मधुबनी जिले की सकरी चीनी मिल को दोबारा चालू करने की घोषणा ने पूरे मिथिला क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ा दी है। करीब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद किसानों, मजदूरों और पुराने कर्मचारियों को एक बार फिर बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई देने लगी है। सकरी चीनी मिल सिर्फ एक उद्योग नहीं थी, बल्कि यह पूरे इलाके की आर्थिक रीढ़ मानी जाती थी।

इस मिल की स्थापना वर्ष 1933 में दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने सूगर मिल कंपनी लिमिटेड के तहत कराई थी। अपने समय में यहां उत्पादित चीनी की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक थी। मिल के पास गन्ना ढुलाई के लिए अपना निजी रेलवे नेटवर्क था, जिससे किसानों को गन्ना मिल तक पहुंचाने में काफी सुविधा होती थी। आसपास के कई रेलवे स्टेशनों पर विशेष व्यवस्था की गई थी।

चीनी मिल के चलते इस क्षेत्र में गन्ने की खेती खूब फल-फूल रही थी। गन्ना किसानों के लिए एक प्रमुख नकदी फसल थी, जिससे वे अपने बच्चों की पढ़ाई, परिवार का खर्च और बेटियों की शादी जैसे बड़े दायित्व आसानी से निभा पाते थे। मिल में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी और मजदूर भी इसी पर निर्भर थे। सकरी चीनी मिल हजारों परिवारों के लिए रोज़गार का सबसे बड़ा साधन थी।

लेकिन वर्ष 1997 में मिल बंद होने से हालात पूरी तरह बदल गए। मिल में कार्यरत लगभग 1100 कर्मचारी और मजदूर अचानक बेरोजगार हो गए। कई परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। पुराने कर्मचारियों के अनुसार, अभाव और बीमारी के कारण कई लोगों की जान तक चली गई।

मिल बंद होने का गहरा असर किसानों पर भी पड़ा। गन्ने की खेती धीरे-धीरे खत्म होने लगी और गन्ने से जुड़े गुड़ उद्योग भी पूरी तरह ठप हो गए। आज जब सकरी चीनी मिल के दोबारा शुरू होने की घोषणा हुई है, तो यह सिर्फ एक मिल का पुनर्जीवन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की उम्मीदों और अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान की शुरुआत मानी जा रही है।