ग्रामीण विकास विभाग की वेस्ट टू आर्ट पहल ला रही रंग, कचरे से कलाकृति बनाकर आत्मनिर्भर बन रही जीविका दीदियां

बिहार सरकार और ग्रामीण विकास विभाग के सतत प्रयासों से राज्य में कचरा प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अनोखी क्रांति देखने को मिल रही है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत कचरा से कला (वेस्ट टू आर्ट) की मुहिम को भोजपुर जिला प्रशासन ने एक नई ऊंचाई दी है, जो अब पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बन चुकी है। इस अभिनव पहल के माध्यम से न केवल कचरे का उचित पुनर्चक्रण और पर्यावरण संरक्षण हो रहा है,  बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

जिला प्रशासन एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत काम कर रही जीविका संस्था के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कचरे से कलात्मक उत्पाद बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर निर्मित अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों से एकत्र किए गए प्लास्टिक, कांच की बोतलें, पुराने कपड़े, जीन्स और अन्य परित्यक्त सामग्रियों का उपयोग करके जीविका दीदियां बेहद खूबसूरत फ्लावर पॉट, गुलदस्ते, गमले, शो-पीस, आभूषण और लटकन तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की कलात्मकता को बढ़ाने के लिए स्थानीय कलाकारों की चित्रकारी की भी मदद ली जा रही है,  जिससे यह सामान न केवल हल्के और टिकाऊ हैं, बल्कि बाजार में काफी आकर्षक और लोकप्रिय भी साबित हो रहे हैं। 

इस पूरी मुहिम को बड़ा प्रोत्साहन तब मिला जब भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया के निर्देश पर जिले के सभी सरकारी कार्यालयों एवं कार्यक्रमों में अतिथियों के स्वागत और स्मृति चिह्न के रूप में कचरे से बने इन फ्लावर पॉट और जीवित पौधों को उपहारस्वरूप देने की परंपरा शुरू की गई। आज वेस्ट टू आर्ट पार्क  की स्थापना, होम डेकोर अलाइव  जैसे स्टार्ट-अप्स और स्वयं सहायता समूहों के साझा प्रयास से 3-आर (रिफ्यूज, रियूज, रिसाइकिल) के सिद्धांतों को बखूबी घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है।

हाल ही में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से गांधी मैदान, पटना में आयोजित राज्य स्तरीय सरस मेले में भी इन वेस्ट टू आर्ट उत्पादों ने खूब सुर्खियां बटोरीं। मेले में जीविका दीदियों द्वारा पुराने कपड़ों के रेशे और प्लास्टर ऑफ पेरिस के मिश्रण से बनाए गए आकर्षक गमलों एवं मूर्तियों की भारी मांग रही और जमकर बिक्री हुई। एक समूह द्वारा दूसरे समूह को प्रशिक्षित करने की इस श्रृंखला पद्धति से जीविका दीदियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार हो गया है,  जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य में ग्रामीण रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।

वेस्ट टू आर्ट के क्षेत्र में होम डेकोर अलाइव एक प्रमुख नाम है, जो बेकार फेंक दिये जाने वाले कपड़ों और अन्य बेकार सामग्रियों से फूलदान, गमला, बर्ड हाउस जैसी उपयोगी, सजावटी और इको फ्रेंडली सामान बनाता है। प्रबंधन की पढ़ाई करने वाले सौरभ कुमार ने इस स्टार्ट-अप की नींव रखी थी। आज यह भोजपुर जिला प्रशासन के विभिन्न कार्यालयों, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओँ को भी वेस्ट टू आर्ट के तहत बने फूलदान की आपूर्ति करते हैं। इस स्टार्ट-अप की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह सामान बनाने और इसकी बिक्री के लिए बाजार तलाशने के साथ लोगों को ट्रेनिंग भी देते हैं। सौरभ बताते हैं कि वे लोगों को वेस्ट से बने फूलदान में लगा पौधा उपहार में देने के लिए प्रेरित करते हैं। अब न सिर्फ सरकारी कार्यालयों में, बल्कि शादी-ब्याह और अन्य अवसरों पर भी लोग उपहार में फूलदान में लगा पौधा भेंट कर रहे हैं।