बिहार की मिट्टी से एक और प्रतिभा दुनिया में मिसाल बन रहा है। कहा जाता है कि प्रतिभा किसी परिचय या सुख-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती और इसे सच कर दिखाया है बिहार के लाल सत्यम कुमार ने। महज 12 साल की उम्र में पहली बार IIT-JEE की परीक्षा पास कर देशभर की सुर्खियां बटोरने वाले सत्यम इन दिनों अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं। सत्यम कुमार ने IIT से अमेरिका और Apple तक का सफर तय किया है।
सत्यम कुमार का जन्म 20 जुलाई 1999 को बिहार के भोजपुर जिले के बखोरापुर गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। साल 2011 में महज 12 साल की उम्र में सत्यम ने पहली बार IIT-JEE की परीक्षा पास कर देश के सबसे कम उम्र के सफल अभ्यर्थी बनने का रिकॉर्ड बनाया। हालांकि, वे अपनी 8137 रैंक से संतुष्ट नहीं थे। 2013 में 13 साल की उम्र में दोबारा परीक्षा देकर AIR 679 हासिल की। मात्र 14 साल की उम्र में उन्हें IIT कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला मिला, जहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक की ड्यूल डिग्री पूरी की। इस सफर को याद करते हुए सत्यम ने एक इंटरव्यू में कहा था-जब मैंने JEE पास किया, तब मेरा सपना सच हो गया। मुझे देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ने का अवसर मिला।
IIT कानपुर में उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और एडवांस कंप्यूटिंग जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता हासिल की। सत्यम के अनुसार-IIT कानपुर का माहौल मुझे रिसर्च और इनोवेशन की ओर लगातार प्रेरित करता रहा। यहीं से मुझे बड़ी और चुनौतीपूर्ण समस्याओं पर काम करने का आत्मविश्वास मिला। IIT कानपुर में अपनी काबिलियत साबित करने के बाद सत्यम ने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग में PhD की डिग्री हासिल की। उन्होंने मात्र 24 साल की उम्र में ‘डॉक्टर’ की उपाधि प्राप्त कर ली।
अपने शोध के दौरान उन्हें Apple में मशीन लर्निंग इंटर्न के रूप में काम करने का अवसर भी मिला, जहां उन्होंने AI रिसर्च से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया। वर्तमान में सत्यम कुमार अमेरिका की प्रतिष्ठित टेक कंपनी Texas Instruments में Machine Learning Systems Research Engineer के रूप में कार्यरत हैं। यहां वे अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीकों के विकास में योगदान दे रहे हैं।
बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी Apple तक पहुंचने का उनका सफर काफी प्रेरणादायक है। सत्यम कुमार की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो अभावों में रहकर बड़े सपने देखते हैं।