भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर घमासान मचा हुआ है। विभिन्न दलों के नेता लगातार मृतक के गांव बिलौटी पहुंच रहे हैं। इस बीच भरत तिवारी मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। भोजपुर एसपी पर परिवार की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। भरत तिवारी की मां-भाई ने एसपी राज पर धमकी देने का आरोप लगाया है।
भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी का दावा है कि पुलिस अधीक्षक की ओर से उन्हें धमकाया गया। आरोपों के सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तूल पकड़ लिया है। चंदन तिवारी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। चंदन तिवारी का आरोप है कि एसपी ने कहा कि यह सब बंद करो, नहीं तो भाई जैसा अंजाम होगा।
वहीं मृतक की मां आशा देवी ने भी एसपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि घटना के करीब आठ दिन बाद एसपी उनके घर आए थे। उनका कहना है कि एसपी ने कहा कि मामले को यहीं खत्म कर दीजिए, मीडिया में बयानबाजी मत करिए नहीं तो दूसरे बेटे का भी भरत जैसा अंजाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि वही ऑर्डर दिए थे भरत को मारने के लिए। भरत तिवारी की मां ने कहा कि जांच पर कोई भरोसा नहीं है। मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।
आरोपों की सत्यता को लेकर स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं, भोजपुर के एसपी राज ने परिवार के सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच न्यायिक आयोग कर रहा है और पुलिस जांच में पूरा सहयोग दे रही है।
बता दें कि भरत तिवारी के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले को लेकर पिछले कई दिनों से सियासत तेज है। विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। परिजन लगातार दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी देने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं। सीएम सम्राट चौधरी ने भी कहा कि भोजपुर की घटना को सरकार ने गंभीरता से लिया है और न्याय सुनिश्चित करने के लिए तत्काल न्यायिक आयोग के गठन का फैसला किया गया है। वहीं सरकार की ओर से गठित न्यायिक जांच समिति के अध्यक्ष हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विनोद सिन्हा ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस विभाग की ओर से जांच की जिम्मेदारी शाहाबाद रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को सौंपी गई है। वहीं इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।