बिहार वाले लेंगे हाई-स्पीड और सिग्नल-फ्री यात्रा का मजा, बन रहे कई बड़े एक्सप्रेसवे, हमेशा के लिए बदल देंगे..

बिहार के लोग भी अब एक्‍सप्रेसवे पर हाई-स्पीड और सिग्नल-फ्री यात्रा का अनुभव ले सकेंगे। बिहार में कई एक्सप्रेसवे का काम प्रगति पर है। जिससे आने वाले समय में बिहार की कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल सकती है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : May 02, 2026, 5:03:00 PM

बिहार के लोग भी अब एक्‍सप्रेसवे पर हाई-स्पीड और सिग्नल-फ्री यात्रा का अनुभव ले सकेंगे। जिससे घंटों की दूरी मिनटों में पूरी होगी और समय की बचत भी होगी।    बिहार में भले ही अभी तक कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू नहीं है। लेकिन राज्य में तेजी से हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। कई एक्सप्रेसवे का काम प्रगति पर है।  जिससे आने वाले समय में बिहार की कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल सकती है।  

बिहार में बड़े एक्सप्रेसवे की बात करें तो अमास-दरभंगा एक्सप्रेसवे सबसे अहम माना जा रहा है।  यह अमास (औरंगाबाद के पास) से शुरू होता है, गया और जहानाबाद से होते हुए पटना पहुंचता है और फिर दरभंगा की ओर जाता है। इसकी लंबाई लगभग 189 किलोमीटर है। फिलहाल इस पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है और इसे राज्य की रीढ़ माना जा रहा है। 2024 के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाए, इसलिए अब सभी लोग 2026 के अंत में खुलने की उम्मीद कर रहे हैं।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे भी एक बड़ा प्रोजेक्ट है. लगभग 245 से 280 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पटना से समस्तीपुर होते हुए पूर्णिया तक जाएगा। यह राजधानी पटना को सुदूर उत्तर-पूर्व में स्थित पूर्णिया से जोड़ता है। यह एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है। इसका सीधा सा मतलब है कि वे किसी पुरानी सड़क को चौड़ा नहीं कर रहे हैं, बल्कि खाली खेतों के बीच से एक बिल्कुल नई सड़क बना रहे हैं। निर्माण कार्य इस वर्ष के अंत में पूरी गति से शुरू हो जाना चाहिए, जिसका लक्ष्य 2028 तक इसे पूरा करना है।

पटना-आरा-सासाराम हाई स्पीड कॉरिडोर को भी एक्सप्रेसवे जैसी सुविधाओं के साथ तैयार किया जा रहा है। करीब 120 किलोमीटर लंबा यह मार्ग सिग्नल-फ्री होगा और यात्रा समय को काफी कम करेगा। यह पांच घंटे की यात्रा को मात्र 90 मिनट की आसान यात्रा में बदल देता है। यह चार लेन वाली सड़क है जो राजधानी को सीधे दिल्ली की ओर जाने वाले मुख्य राजमार्ग से जोड़ती है। 2027 या 2028 तक इसका काम पूरा हो सकता है।

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे गंगा के किनारे-किनारे पश्चिम से पूर्व बिहार को जोड़ने की योजना है। वहीं हल्दिया–रक्सौल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे जैसे इंटर-स्टेट प्रोजेक्ट भी बिहार से होकर गुजरेंगे, जिससे राज्य को नेशनल और इंटरनेशनल कनेक्टिविटी मिलेगी। 

वहीं गोरखपुर से सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे यह एक अंतरराज्यीय राजमार्ग है जिसका अधिकांश हिस्सा (416 किमी) बिहार के भीतर पड़ता है। जबकि वाराणसी से औरंगाबाद एक्सप्रेसवे: यह लगभग 192 किलोमीटर लंबा है, जो मंदिर नगरी वाराणसी से शुरू होकर बिहार के औरंगाबाद में समाप्त होता है। यह कैमूर और रोहतास से होकर गुजरता है। 

इतना ही नहीं पटना शहर में जेपी गंगा पथ विस्तार परियोजना पर भी काम जारी है।  इसका कुल विस्तार करीब 55 किलोमीटर तक किया जा रहा है, जिससे राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम होगा।  बता दें कि एक्सप्रेसवे को खासतौर से लंबी दूरी के लिए और तेज स्‍पीड से चलने के लिए बनाया जाता है। अमूमन एक्‍सप्रेसवे की स्‍पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है, लेकिन नेशनल एस्‍सप्रेसवे की स्‍पीड 120 किलोमीटर से भी ज्‍यादा होती है।