बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर हलचल तेज हो गई है। हजार पंचायतों में चुनावी रणभेरी बजने को तैयार है। ऐसे में हैं गांवों में सियासी पारा हाई हो गया है। मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य समेत तमाम संभावित उम्मीदवार अभी से ही जनता के बीच एक्टिव हो गए हैं। इस बीच पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव अपने तय समय पर ही कराए जाएंगे और किसी भी तरह की देरी नहीं होगी।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ कर दिया है कि चुनाव तय समय पर इसी साल कराया जाएगा। जनसंख्या प्रकाशन, आपत्ति प्रक्रिया, आरक्षण रोस्टर और ईवीएम तैयारी जैसे जरूरी काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों स्तर पर चुनाव की तैयारियां तेजी से शुरू कर दी गई हैं। इस पूरी चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश में कहा कि 9 जून को जनसंख्या का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद आरक्षण रोस्टर पर काम शुरू होगा। इसी आरक्षण व्यवस्था से तय होगा कि कौन सी पंचायत सीट सामान्य रहेगी, कौन सी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्गों के लिए आरक्षित होगी। माना जा रहा है कि इस बार आरक्षण रोस्टर में बड़े बदलाव हो सकते हैं, जिससे कई पंचायतों के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
मंत्री ने बताया कि निर्वाचन आयोग की ओर से मल्टीपोस्ट ईवीएम समेत बाकी तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां भी की जा रही हैं। सरकार की कोशिश है कि पंचायत चुनाव पूरी तरह फ्री एंड फेयर हो, ताकि हर स्तर पर निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जा सके। सरकार ने घोषणा की है कि 9 जून को जनसंख्या का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद लोगों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद का समय रहते समाधान किया जा सके।
बता दें कि अभी पंचायत चुनाव की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि अक्टूबर 2026 के आसपास चुनाव कराए जा सकते हैं। बिहार में 8 हजार से ज्यादा पंचायतों में चुनाव होना है। माना जा रहा है कि इस बार आरक्षण रोस्टर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो कई पंचायतों के चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। ग्रामीण इलाकों में इसी बदलाव की संभावना ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है। जैसे-जैसे जनसंख्या प्रकाशन, आरक्षण रोस्टर और चुनावी तारीखों से जुड़े फैसले सामने आते जाएंगे, वैसे वैसे पंचायत चुनाव में हलचल बढ़ जाएगी। फ़िलहाल तो सबको नजरें पंचायत चुनाव की तारीखों के ऐलान पर है।