CJI पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर को नहीं है अफसोस, ‘दैवीय शक्ति के निर्देश’ का किया दावा

CJI पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर को नहीं है अफसोस, ‘दैवीय शक्ति के निर्देश’ का किया दावा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Oct 07, 2025, 11:16:00 AM

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले 72 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने घटना के बाद भी अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं जताया है। किशोर ने यह दावा किया है कि उसे यह कदम उठाने के लिए ‘दैवीय शक्ति’ का मार्गदर्शन मिला था। हालांकि, उसने यह भी स्वीकार किया कि इस घटना से उसके परिवार के सदस्य बेहद नाराज और शर्मिंदा हैं।

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को किशोर से तीन घंटे तक सुप्रीम कोर्ट परिसर में पूछताछ की और बाद में किसी औपचारिक शिकायत के अभाव में दोपहर दो बजे उसे छोड़ दिया। जांच के बाद पुलिस ने उसका जूता भी लौटा दिया।

‘जेल जाना मंजूर, पर माफी नहीं मांगूंगा’
मीडिया से बातचीत में किशोर ने कहा कि उसे अपने कदम पर कोई पछतावा नहीं है और वह जेल जाने के लिए तैयार है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उसका किसी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं है।
किशोर ने कहा, “अगर जेल चला जाता, तो शायद बेहतर होता। मेरा परिवार बहुत दुखी है, वे मुझे समझ नहीं पा रहे हैं।”

उसने बताया कि यह कदम उसने भगवान विष्णु की एक बगैर सिर वाली मूर्ति के मामले में मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणी से आहत होकर उठाया।
किशोर ने कहा, “फैसले के बाद मैं सो नहीं सका। ऐसा लगा जैसे भगवान मुझसे पूछ रहे हों कि उनके अपमान के बाद मैं चैन से कैसे रह सकता हूं।”

वकील ने यह भी कहा कि वह सीजेआई की मॉरिशस यात्रा के दौरान दिए गए बयानों से भी निराश था। तब सीजेआई ने कहा था, “भारत की न्याय व्यवस्था कानून से चलती है, बुलडोज़र से नहीं।”

SCBA ने किया निलंबित, कहा – ‘वह मुश्किल से किसी केस में पेश हुआ है’
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के संयुक्त सचिव मीनेश दुबे ने बताया कि किशोर साल 2011 से एसोसिएशन का अस्थायी सदस्य था, लेकिन उसने बहुत कम मामलों में पेशी दी।
उन्होंने कहा, “स्थायी सदस्य बनने के लिए किसी वकील को लगातार दो वर्षों में कम से कम 20 मामलों में पेश होना होता है। उसने कभी यह शर्तें पूरी नहीं कीं।”

घटना के बाद मीनेश दुबे ने किशोर से मुलाकात की। उन्होंने बताया, “वह अपने किए पर अडिग है, उसे कोई पछतावा नहीं है और उसने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया।”
किशोर के परिजनों ने मीडिया से बात करने से इनकार किया, लेकिन घटना पर असंतोष और शर्मिंदगी जाहिर की है।

सीजेआई ने कहा – ‘हम विचलित नहीं होते’
घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही कुछ क्षणों के लिए बाधित हुई, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने पूरे संयम के साथ स्थिति को संभाला। उन्होंने अदालत के सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों से कहा कि “घटना को नजरअंदाज किया जाए और आरोपी वकील को केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए।”
सीजेआई ने कहा, “ऐसी चीजें हमें विचलित नहीं करतीं। हम अपने काम से प्रभावित नहीं होते।”

इसके बाद राकेश किशोर को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह घटना सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की उन दुर्लभ घटनाओं में से एक है, जिसने कानूनी समुदाय और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया।