सुप्रीम कोर्ट में वकील ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की, नारा लगाया- सनातन का अपमान नहीं सहेंगे

सुप्रीम कोर्ट में वकील ने CJI पर जूता फेंकने की कोशिश की, नारा लगाया- सनातन का अपमान नहीं सहेंगे

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Oct 06, 2025, 1:44:00 PM

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक असामान्य घटना सामने आई, जब एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर हमला करने का प्रयास किया। यह घटना उस समय हुई जब CJI की अध्यक्षता वाली बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी।

सूत्रों के अनुसार, वकील CJI की मेज के पास गया और जूता निकालकर उन पर फेंकने की कोशिश की। इस दौरान कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे काबू कर लिया। बाहर जाते समय आरोपी वकील ने नाराज़गी जताते हुए नारा लगाया – “सनातन का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

घटना के बाद CJI बीआर गवई ने शांति बनाए रखते हुए अदालत में उपस्थित वकीलों से कहा कि वे अपनी दलीलें जारी रखें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना से वे परेशान नहीं हैं और उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी वकील का नाम राकेश किशोर है, जिनका सुप्रीम कोर्ट बार में पंजीकरण 2011 का है। माना जा रहा है कि वकील CJI की मध्य प्रदेश के खजुराहो में भगवान विष्णु की 7 फुट ऊंची खंडित मूर्ति के पुनर्स्थापन पर दिए गए बयान से नाराज थे।

CJI ने 16 सितंबर को इस याचिका को खारिज करते हुए कहा था – “जाओ और भगवान से खुद करने को कहो। यदि आप भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हैं तो उनसे प्रार्थना करें।”

भगवान विष्णु की मूर्ति का विवाद

16 सितंबर को मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची खंडित मूर्ति के पुनर्स्थापन की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के निर्णय पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि यह हमारी धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मूर्ति अपनी वर्तमान स्थिति में रहेगी और अगर श्रद्धालु पूजा करना चाहते हैं तो वे अन्य मंदिरों में जा सकते हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह मूर्ति मुगलों के हमलों के दौरान क्षतिग्रस्त हुई थी और तब से इस स्थिति में है। इसलिए उन्होंने मंदिर की पवित्रता बनाए रखने और पूजा करने के अधिकार की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी।

CJI की सफाई

18 सितंबर को, विवादित टिप्पणी के बाद CJI बीआर गवई ने सफाई दी थी कि उनकी बात को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। बेंच के अन्य जस्टिस विनोद चंद्रन ने सोशल मीडिया पर फैलाए गए झूठे विवरणों पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे “एंटी-सोशल मीडिया” करार दिया। वहीं याचिकाकर्ता के वकील संजय नूली ने कहा कि CJI के बारे में सोशल मीडिया पर फैलाए गए दावे गलत हैं।