बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के साथ नए दौर का आगाज़ हो गया है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली, जिसके साथ ही राज्य में नई सरकार का औपचारिक गठन हो गया। इस मौके पर कई वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति रही, जबकि समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
शपथ लेने के बाद अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का मुख्य फोकस राज्य के समग्र विकास और बेहतर प्रशासन पर रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि बिहार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सुशासन और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिवर्तन राज्य की सत्ता संरचना में एक नई दिशा का संकेत देता है।
यह पहला अवसर है जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता बिहार की सत्ता के शीर्ष पद पर पहुंचा है। इससे पहले सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभा चुके हैं। हाल ही में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके पश्चात बीजेपी विधायक दल ने सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी को अपना नेता चुना।
नीतीश कुमार का कार्यकाल करीब दो दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने लंबे समय तक राज्य की बागडोर संभाली। अब सत्ता का दायित्व सम्राट चौधरी के कंधों पर आ गया है, जिससे बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर तीन दशक से अधिक पुराना है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1990 के दशक में की थी और 1999 में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री के रूप में पहली बार मंत्री पद संभाला था। बाद में उन्होंने विभिन्न सरकारों में अहम विभागों की जिम्मेदारी निभाई; 2014 में शहरी विकास और आवास मंत्री, 2021 में पंचायती राज मंत्री और 2024 में एनडीए सरकार में उपमुख्यमंत्री के तौर पर कार्य किया।
इस राजनीतिक परिवर्तन पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सम्राट चौधरी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भरोसा जताया कि नए नेतृत्व में बिहार विकास, सुशासन और समृद्धि के नए आयाम स्थापित करेगा।