पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर! TMC के बागी गुट को मिली मान्यता, ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर! TMC के बागी गुट को मिली मान्यता, ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर! TMC के बागी गुट को मिली मान्यता, ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: Jun 03, 2026, 6:56:00 PM

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहां तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर उभरे बागी खेमे को विधानसभा अध्यक्ष की ओर से मान्यता मिलने के बाद सियासी समीकरण बदल गए हैं। पार्टी से निष्कासित किए जा चुके विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह को विधानसभा में वैध गुट के रूप में स्वीकार कर लिया गया है। इसके साथ ही ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा भी प्रदान किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में करीब 60 विधायक विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ बोस से मिले थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि वही टीएमसी का वास्तविक विधायी समूह है और उनके नेता को सदन में औपचारिक मान्यता दी जानी चाहिए। अध्यक्ष द्वारा इस दावे को स्वीकार किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

इस विवाद की पृष्ठभूमि हालिया चुनाव परिणामों से जुड़ी है। चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस ने बालीगंज से विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधायक दल का नेता चुना था। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की ओर से विधानसभा सचिवालय को पत्र भेजकर इस निर्णय की जानकारी दी गई और उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया गया।

हालांकि, बाद में इस पत्र को लेकर हस्ताक्षरों की कथित जालसाजी का विवाद खड़ा हो गया। मामले की जांच राज्य की सीआईडी को सौंपी गई। जांच के दौरान कई विधायकों से पूछताछ की गई और अभिषेक बनर्जी को भी नोटिस जारी किया गया। इसी बीच, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कथित रूप से हस्ताक्षर संबंधी अनियमितताओं का मुद्दा सार्वजनिक किया, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने दोनों नेताओं को संगठन से बाहर कर दिया।

इन घटनाओं के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि बड़ी संख्या में विधायक ऋतब्रत बनर्जी के साथ खड़े हो गए हैं। बताया गया कि हालिया चुनाव में 80 सीटें जीतने वाली पार्टी के भीतर विभाजन की स्थिति बन गई है। दलबदल विरोधी प्रावधानों से बचने के लिए आवश्यक संख्या से अधिक विधायकों का समर्थन जुटाने का दावा भी बागी खेमे ने किया।

बुधवार को विधानसभा में हुई बैठक में ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस संबंध में स्पीकर को सौंपे गए दस्तावेज पर 59 विधायकों के हस्ताक्षर दर्ज बताए गए, जबकि कुछ अन्य सदस्यों के समर्थन का भी दावा किया गया।

बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष औपचारिक रूप से अपने नए नेतृत्व ढांचे की घोषणा भी की। इसके तहत जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उपनेता की जिम्मेदारी दी गई, जबकि अखरुज़्ज़मां को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त किया गया। दिलचस्प बात यह रही कि प्रस्तुत दस्तावेज में ममता बनर्जी को अब भी सर्वोच्च नेता के रूप में उल्लेखित किया गया।

स्पीकर की मंजूरी के बाद ऋतब्रत बनर्जी का गुट विधानसभा में टीएमसी के आधिकारिक विधायी दल के रूप में स्थापित हो गया है। इसके साथ ही ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष की संवैधानिक मान्यता भी मिल गई है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व के करीबी सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व इस घटनाक्रम को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में टकराव और कानूनी-राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।