पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल का विस्तार! शुभेंदु अधिकारी सरकार में 35 नये चेहरों की एंट्री, अनुभवी और युवा नेताओं को मिला मौका
पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल का विस्तार! शुभेंदु अधिकारी सरकार में 35 नये चेहरों की एंट्री, अनुभवी और युवा नेताओं को मिला मौका
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने सोमवार (1 जून 2026) को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कुल 35 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने सभी नव-नियुक्त मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
सरकार के इस विस्तार को प्रशासनिक मजबूती और राजनीतिक संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्रिमंडल में वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ नए और युवा चेहरों को भी शामिल किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर अनुभव तथा नई ऊर्जा का मिश्रण तैयार करने की कोशिश कर रही है।
शपथ ग्रहण प्रक्रिया की शुरुआत कैबिनेट मंत्रियों से हुई। पहले चरण में आठ नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जबकि इसके बाद राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया जाएगा, जिसमें कई प्रमुख नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
नए मंत्रिमंडल में दीपक बर्मन, तपस रॉय, डॉ. शंकर घोष, मनोज कुमार ओरांव, अर्जुन सिंह, गौरी शंकर घोष, स्वपन दासगुप्ता, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, कल्याण चक्रवर्ती, अजय पोद्दार, सरदवत मुखर्जी, दूध कुमार मंडल और अनूप कुमार दास को कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है।
वहीं, डॉ. इंद्रनील खान, मालती रावा रॉय और राजेश महतो को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया गया है।
इसके अलावा जोएल मुर्मू, हरे कृष्ण बेरा, आनंदमय बर्मन, अशोक डिंडा, नाडियार चंद बाउरी, विशाल लामा, शांतनु प्रमाणिक, मौमिता बिस्वास मिश्रा, उमेश रे, पूर्णिमा चक्रवर्ती, कौशिक चौधरी, भास्कर भट्टाचार्य, दिबाकर घरामी, अमिया किस्कू, कलिता माझी, गार्गी दास घोष, बिराज बिस्वास, दीपांकर जाना और सुमना सरकार समेत कई नेताओं को राज्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राज्य सरकार की कुल ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब सभी की नजरें विभागों के आवंटन पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सरकार प्रशासनिक प्राथमिकताओं को किस दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है।