मकर संक्रांति पर विजय सिन्हा के दही-चूड़ा भोज में सियासी हलचल, संतोष मांझी ने तेजप्रताप को दिया NDA में आने का ऑफर

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बिहार की राजनीति में आज सियासी गर्माहट देखने को मिली। राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने अपने पटना स्थित आवास पर पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया।

मकर संक्रांति पर विजय सिन्हा के दही-चूड़ा भोज में सियासी हलचल, संतोष मांझी ने तेजप्रताप को दिया NDA में आने का ऑफर
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 13, 2026, 2:28:00 PM

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बिहार की राजनीति में आज सियासी गर्माहट देखने को मिली। राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने अपने पटना स्थित आवास पर पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इस अवसर पर एनडीए के कई बड़े नेता और मंत्री शामिल हुए।

इस भोज की सबसे अहम राजनीतिक चर्चा तब शुरू हुई, जब केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के बेटे और मंत्री संतोष मांझी ने आरजेडी नेता तेजप्रताप यादव को एनडीए में शामिल होने का खुला ऑफर दे दिया। संतोष मांझी ने कहा कि अगर तेजप्रताप एनडीए में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई अटकलें तेज हो गई हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने खुद अपने हाथों से दही-चूड़ा परोसा और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को मिठाई खिलाकर मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं। यह दृश्य एनडीए की एकजुटता और आपसी तालमेल का संदेश देता नजर आया।

इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय चौधरी, संतोष सुमन, संजय झा, मंगल पांडे, संजय पासवान, संजय सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री मौजूद रहे। खास बात यह रही कि विजय सिन्हा ने बीजेपी के साथ-साथ एनडीए के सभी घटक दलों के नेताओं को आमंत्रित किया था।

मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि एनडीए के सभी घटक दलों के नेता एक साथ उपस्थित हुए और मिलकर इस पारंपरिक पर्व की मिठास का आनंद लिया। उन्होंने कहा कि यह मिठास ऊर्जा बनकर बिहार के विकास में योगदान देगी।

वहीं मंत्री मंगल पांडे ने मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो किसानों के लिए बेहद खास होता है। उन्होंने कहा कि इस दिन के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत होती है और देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।

कुल मिलाकर, मकर संक्रांति के बहाने यह दही-चूड़ा भोज न सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन रहा, बल्कि बिहार की राजनीति में कई सियासी संकेत भी दे गया।