पटना पहुंचते ही तेजस्वी यादव बोले—100 दिन नहीं करूंगा सरकार पर वार, जनता के सामने रखूंगा कामकाज का सच

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव करीब 40 दिनों के लंबे विदेश दौरे के बाद अपने गृह राज्य लौट आए हैं। बिहार लौटते ही उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है

पटना पहुंचते ही तेजस्वी यादव बोले—100 दिन नहीं करूंगा सरकार पर वार, जनता के सामने रखूंगा कामकाज का सच
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Karishma Singh
: Jan 11, 2026, 3:32:00 PM

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव करीब 40 दिनों के लंबे विदेश दौरे के बाद अपने गृह राज्य लौट आए हैं। बिहार लौटते ही उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। तेजस्वी यादव ने ऐलान किया है कि वह अगले 100 दिनों तक राज्य सरकार के खिलाफ कोई बयान नहीं देंगे, बल्कि इस दौरान सरकार के कामकाज और नीतियों पर बारीकी से नजर रखेंगे।

पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने साफ कहा कि वह फिलहाल किसी भी तरह की राजनीतिक बयानबाजी से दूरी बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा, “मैं अगले 100 दिनों तक इस सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोलूंगा। मैं देखूंगा कि सरकार अपने वादों पर कितनी खरी उतरती है और उसका कार्यकाल किस दिशा में आगे बढ़ता है। इसके बाद ही जनता और विपक्ष के नजरिए से अपनी प्रतिक्रिया दूंगा।”

तेजस्वी यादव ने इस मौके पर लोगों को नव वर्ष की शुभकामनाएं भी दीं। साथ ही उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि चुनाव में ‘लोक’ की हार हुई और ‘तंत्र’ की जीत हुई। उनके मुताबिक, जनता की इच्छाओं को दबाकर मशीन और धन के दम पर चुनावी नतीजे प्रभावित किए गए।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र को धन-तंत्र और मशीन-तंत्र में बदल दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव किस तरह जीते गए और क्या पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप थी। तेजस्वी ने कहा कि जनता सब कुछ जानती है और सरकार कैसे बनी, यह किसी से छिपा नहीं है।

तेजस्वी यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले 100 दिनों में वह सरकार के हर वादे को कसौटी पर परखेंगे। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों को 2 लाख रुपये की सहायता कब मिलेगी, एक करोड़ युवाओं को रोजगार कब दिया जाएगा और हर जिले में कारखाने लगाने का वादा कब हकीकत बनेगा—इन सभी बातों पर उनकी पैनी नजर रहेगी।

अब देखना होगा कि 100 दिनों की यह ‘खामोशी’ बिहार की राजनीति में क्या नया मोड़ लाती है।